गुनिया नदी पुनर्जीवन परियोजना की समीक्षा, वैज्ञानिक मानकों पर काम के निर्देश; अतिक्रमण हटाने की मांग बरकरार
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल की अध्यक्षता में गुनिया नदी पुनर्जीवन एवं सौंदर्यीकरण परियोजना के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर कलेक्टर अखिलेश जैन, तकनीकी विशेषज्ञों की टीम एवं नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

बैठक में परियोजना के तकनीकी डिजाइन, बाढ़ प्रबंधन, जल संरक्षण, संरचनात्मक व्यवस्था तथा नदी के सौंदर्यीकरण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कलेक्टर ने परियोजना के प्रत्येक तकनीकी पहलु की जानकारी लेते हुए कार्यों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बाढ़ प्रबंधन एवं जल संरक्षण की तकनीकी व्यवस्था पर दी जानकारी
बैठक में तकनीकी टीम ने बताया कि नदी में जल का संरक्षण मुख्य रूप से उसकी गहराई एवं जलधारण क्षेत्र (एरिया) पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि संरचनाओं में पत्थरों के उपयोग से पानी की गति नियंत्रित होती है, जिससे बहाव की तीव्रता कम होती है तथा जल का अनावश्यक नुकसान भी घटता है।

स्टॉप डैम की कार्यप्रणाली समझाते हुए बताया गया कि उसकी डिजाइन में जल प्रवाह की गति का विशेष ध्यान रखा जाता है। अत्यधिक धीमी गति होने पर गाद (सिल्ट) जमने लगती है, जबकि अधिक तेज गति से मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है।
इसलिए ऐसी न्यूनतम गति निर्धारित की जाती है, जिससे जल का प्रवाह भी बना रहे और गाद का जमाव भी न हो।
स्ट्रक्चर डिजाइन एवं रखरखाव की व्यवस्थाओं पर हुई चर्चा
तकनीकी टीम ने बैठक में स्ट्रक्चर के डिजाइन, स्लोप एवं अन्य इंजीनियरिंग पहलुओं की जानकारी प्रस्तुत की।
बताया गया कि जल प्रवाह बढ़ने की स्थिति में संरचना के स्टैंडिंग एरिया का भी विस्तार किया जाता है, जिससे अतिरिक्त जल प्रवाह का सुरक्षित प्रबंधन हो सके।
स्ट्रक्चर की डिजाइन में जेसीबी जैसी मशीनों के आवागमन की व्यवस्था भी शामिल की गई है, ताकि भविष्य में सफाई एवं रखरखाव का कार्य सुगमता से किया जा सके।
सौंदर्यीकरण की रूपरेखा पर भी हुआ मंथन
बैठक के दूसरे चरण में गुनिया नदी के सौंदर्यीकरण संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
इसमें नदी किनारे विकसित किए जाने वाले विभिन्न डिजाइन, प्लांटेशन, आकर्षक रंग संयोजन, सार्वजनिक उपयोग की सुविधाओं तथा अन्य सौंदर्यपरक तत्वों पर विचार-विमर्श किया गया।
कलेक्टर श्री कन्याल ने निर्देश दिए कि नदी के पुनर्जीवन के साथ-साथ इसे नागरिकों के लिए आकर्षक एवं उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में समग्र योजना के अनुसार कार्य किया जाए।
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