पंजाब में 36 हजार से अधिक दवा विक्रेता, निगरानी के लिए सिर्फ 51 अधिकारी
चंडीगढ़। पंजाब में दवा विक्रेताओं की बड़ी संख्या के मुकाबले निगरानी अधिकारियों की कमी ने दवाओं की बिक्री और नियामक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में 36,112 खुदरा और थोक दवा विक्रेता हैं, जबकि इनकी निगरानी की जिम्मेदारी केवल 51 ड्रग कंट्रोल अधिकारियों पर है। विभाग में वर्ष 2020 के बाद से नई भर्ती नहीं हुई है।
ड्रग कंट्रोल विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी दवा दुकानों का निरीक्षण करने, दवाओं के नमूने लेने, लाइसेंस संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की है। अधिकारियों की सीमित संख्या के कारण प्रदेश के सभी जिलों में नियमित जांच और प्रभावी निगरानी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। कई जिलों में केवल एक ड्रग कंट्रोल अधिकारी तैनात है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच 16,788 निरीक्षण किए गए। इस दौरान 214 लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस संचालित फर्मों से नियमों के उल्लंघन के मामलों में 20.64 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की गईं। इसी अवधि में 520 केमिस्टों के लाइसेंस निलंबित किए गए और 22 के लाइसेंस रद्द हुए। इसके अलावा, 54 मामले अदालतों में दर्ज किए गए, जबकि 35 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई और जुर्माना लगाया गया।
फार्मा नशे के लिए दवाओं के दुरुपयोग को रोकना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। हाल के दिनों में पंजाब में दवाओं की कथित अवैध बिक्री को लेकर कई घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने दवा विक्रेताओं की निगरानी, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और बार-बार नियम तोड़ने वालों को रोकने की व्यवस्था पर नए सवाल खड़े किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दवा बाजार की प्रभावी निगरानी के लिए पर्याप्त कर्मचारियों, नियमित निरीक्षण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। हालांकि, जब्त की गई सभी दवाओं को नशे से जुड़ा मानना सही नहीं होगा, क्योंकि कार्रवाई में दवा कानूनों के अलग-अलग उल्लंघन भी शामिल हैं।
राज्य में दवा बिक्री से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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