विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर किरेन रिजिजू से भिड़े थरूर
एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शनों को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के आरोपों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जवाब दिया है। थरूर ने कहा कि विपक्ष हिंसा का समर्थन नहीं करता और उसकी मांग स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव कराने की है। उन्होंने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चिंता जताते हुए इसे सांविधानिक मुद्दा बताया।
नई दिल्ली। एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शनों को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के आरोपों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जवाब दिया है। थरूर ने कहा कि विपक्ष हिंसा का समर्थन नहीं करता और उसकी मांग स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव कराने की है। उन्होंने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चिंता जताते हुए इसे सांविधानिक मुद्दा बताया।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी है। शशि थरूर ने कहा कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उन्होंने कहा कि विपक्ष हिंसा का समर्थन नहीं करता, बल्कि उसकी मांग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की है।
कांग्रेस सांसद थरूर ने केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम में कहा कि फ्रांस में बसों और पुलिस थानों को आग लगाने जैसी हिंसक घटनाओं का विपक्ष कभी समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष शांतिपूर्ण विरोध में विश्वास करता है और वह खुद भी इसी तरह के प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया था कि कुछ नेताओं और भारत विरोधी समूहों ने मिलकर देश में युवाओं को भड़काने और सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। उन्होंने बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं और फ्रांस में दंगों, आगजनी तथा लूटपाट का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। रिजिजू ने यह भी कहा था कि भारत में सत्ता परिवर्तन हो सकता है, लेकिन यह चुनाव के जरिए ही संभव है।
अपने बयान में रिजिजू ने जॉर्ज सोरोस का भी जिक्र किया था। उन्होंने एक वीडियो साझा किया था, जिसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण सत्ता परिवर्तन की बात करते दिखाई देते हैं।
रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने कहा कि सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग सत्ता गिराने की नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की है। थरूर ने कहा, "आज चिंता की बात यह है कि एक पूरी तरह समस्याग्रस्त, अनियमित और आंशिक रूप से अवैध प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसी वजह से हम इन फैसलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।"
थरूर ने आगे कहा, "यह सांविधानिक मुद्दा है। इसका किसी सरकार को गिराने या सत्ता पलटने की कोशिश से कोई संबंध नहीं है। लोकतंत्र किसी का दिया हुआ उपहार नहीं है। देश के आम नागरिक इसके संरक्षक हैं और हर भारतीय को लोकतंत्र की रक्षा करने का अधिकार है।"
थरूर ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं से भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाने की मांग कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष संस्थाओं को चुनौती नहीं दे रहा, बल्कि उनके काम करने के तरीके और आचरण पर सवाल उठा रहा है। थरूर के मुताबिक, यह ऐसा मुद्दा है जिस पर देश के सभी नागरिकों को चिंता करनी चाहिए।
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