म्यांमार मानव तस्करी–साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़, एनआईए ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
नई दिल्ली (आरएनआई)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने म्यांमार से संचालित मानव तस्करी और साइबर ठगी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। यह गिरोह भारत के युवाओं को विदेश में आकर्षक नौकरी का झांसा देकर फंसाता था और फिर उन्हें म्यांमार ले जाकर साइबर ठगी के काम में जबरन झोंक देता था।
एनआईए की ओर से यह चार्जशीट हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष अदालत में दाखिल की गई है। आरोपियों में अंकित कुमार उर्फ अंकित भारद्वाज, इश्तिखार अली उर्फ अली और एक फरार चीनी महिला लीसा शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार यह नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और इसकी जड़ें कई देशों तक फैली हुई थीं।
जांच में सामने आया है कि आरोपी भारतीय युवाओं को पहले थाईलैंड में अच्छी नौकरी का ऑफर देते थे। ऑनलाइन इंटरव्यू कराए जाते थे, जिनमें चीनी महिला लीसा को असली रिक्रूटर के तौर पर पेश किया जाता था। भरोसा जीतने के बाद युवाओं को गैरकानूनी तरीके से थाईलैंड के रास्ते म्यांमार पहुंचाया जाता था। वहां पहुंचते ही उनका पासपोर्ट और दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उन्हें साइबर ठगी करने वाली कंपनियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।
एनआईए के मुताबिक म्यांमार में पीड़ित युवाओं से नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल बनवाए जाते थे और फिर उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के लोगों को क्रिप्टो निवेश के नाम पर ठगने के लिए मजबूर किया जाता था। जो युवक काम करने से इनकार करता, उसे बंधक बना लिया जाता, मारपीट और मानसिक दबाव डाला जाता और रिहाई के बदले मोटी रकम की मांग की जाती थी।
इस मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, साथ ही इमिग्रेशन एक्ट की धारा 24 भी लगाई गई है। फिलहाल अंकित कुमार और इश्तिखार अली गिरफ्त में हैं, जबकि चीनी महिला लीसा अब भी फरार है। एनआईए का कहना है कि फरार आरोपी की तलाश जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
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