मोदी सरकार की ताकत अब चुनौती बनती सोशल मीडिया की ताकत? CJP आंदोलन के संदर्भ में उठे सवाल
नई दिल्ली। सोशल मीडिया की बदलती भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। एक टिप्पणी में दावा किया गया है कि जो सोशल मीडिया कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना जाता था, वही अब सरकार के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
टिप्पणी के अनुसार, 2016 में सस्ते और व्यापक मोबाइल इंटरनेट की उपलब्धता के बाद सोशल मीडिया का तेजी से विस्तार हुआ। शुरुआत में इसे मनोरंजन और जनसंपर्क का प्रभावी माध्यम माना गया, लेकिन समय के साथ यही मंच नागरिकों द्वारा स्थानीय समस्याओं, भ्रष्टाचार, खराब सड़कों, पुल हादसों और प्रशासनिक खामियों के वीडियो साझा करने का प्रमुख जरिया बन गया।
लेख में कहा गया है कि पहले सरकारें पारंपरिक मीडिया के माध्यम से अपना पक्ष अधिक प्रभावी ढंग से रख पाती थीं, लेकिन अब सोशल मीडिया पर सूचनाओं की तत्काल जांच-पड़ताल और वैकल्पिक दावों के सामने आने से सार्वजनिक विमर्श का स्वरूप बदल गया है। इसमें यह भी दावा किया गया है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई नेताओं पर सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाए जाते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर भी मीम्स एवं आलोचनात्मक सामग्री वायरल होती रहती है।
टिप्पणी में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों पर सार्वजनिक निगरानी पहले की तुलना में अधिक बढ़ी है। लेखक ने CJP आंदोलन को भी सोशल मीडिया की इसी बढ़ती ताकत का परिणाम बताया है।
हालांकि, लेख के अंत में यह दावा किया गया है कि यदि सरकार को भविष्य में चुनावी लाभ बनाए रखना है तो उसे सोशल मीडिया पर नियंत्रण या प्रतिबंध जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। यह लेखक का व्यक्तिगत मत है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)