पत्रकारिता की असली पाठशाला ज़मीन है, सिर्फ थ्योरी नहीं: राजेन्द्र सिंह जादौन
वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र सिंह जादौन ने अपने लेख में कहा है कि पत्रकारिता केवल किताबों और विश्वविद्यालय की डिग्री से नहीं, बल्कि ज़मीनी अनुभव, संघर्ष और जनता के बीच रहकर सीखी जाती है। उनके अनुसार, पत्रकारिता की थ्योरी इसकी बुनियाद जरूर है, लेकिन उसकी वास्तविक ताकत मैदान में काम करने, तथ्यों की पड़ताल करने और समाज की समस्याओं को समझने से आती है।
उन्होंने लिखा कि देश के कई प्रतिष्ठित पत्रकार बिना औपचारिक पत्रकारिता की शिक्षा के भी अपनी निष्पक्षता, विश्वसनीयता और जनसरोकारों के कारण पहचान बना चुके हैं। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि केवल डिग्री या तकनीकी दक्षता किसी को अच्छा पत्रकार नहीं बनाती, यदि वह ज़मीन पर जाकर सच्चाई तलाशने और सत्ता से सवाल पूछने का साहस नहीं रखता।
लेख में टीवी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर भी टिप्पणी की गई है। जादौन के अनुसार, कई चैनलों पर खबरों की जगह शोर और टीआरपी की होड़ ने ले ली है, जबकि प्रिंट मीडिया आज भी तथ्यपरकता और संपादकीय जांच के कारण अपनी विश्वसनीयता बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने पत्रकारिता को नई दिशा दी है, जहां अब एक मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से भी लाखों लोगों तक खबर पहुंचाई जा सकती है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इस मंच पर अफवाहों और सनसनी से बचते हुए तथ्य आधारित पत्रकारिता करना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।
राजेन्द्र सिंह जादौन ने लेख के अंत में कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य किसी सरकार के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं, बल्कि जनता के हित में सच को सामने लाना है। उन्होंने नई पीढ़ी के पत्रकारों से अपील की कि वे थ्योरी का सम्मान करें, लेकिन अपनी सबसे बड़ी पाठशाला ज़मीन, समाज और आम जनता को बनाएं।
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