संजय सिन्हा का टीवी एंकरों पर तीखा हमला, बोले- कैमरे पर दिखना और पत्रकार होना अलग बातें
नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार संजय सिन्हा ने टीवी न्यूज़ इंडस्ट्री में एंकरों की भूमिका और पत्रकारिता की परिभाषा को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि कैमरे पर दिखाई देने वाला हर व्यक्ति पत्रकार नहीं होता और कई टीवी एंकरों ने पत्रकारिता नहीं, बल्कि पहचान, ग्लैमर और लोकप्रियता का रास्ता चुना।
उन्होंने कहा कि टीवी न्यूज़ चैनलों ने वर्षों तक दर्शकों के सामने चेहरों को इस तरह पेश किया कि खबर से अधिक एंकर की पहचान महत्वपूर्ण बन गई। उनके अनुसार, यह मीडिया संस्थानों की रणनीति थी, जिसने प्रस्तोता और पत्रकार के बीच की रेखा धुंधली कर दी।
संजय सिन्हा का कहना है कि किसी न्यूज़ एंकर का मुख्य काम रिपोर्टर और प्रोड्यूसर द्वारा तैयार की गई सामग्री को प्रस्तुत करना होता है। कौन-सी खबर चलेगी, स्क्रिप्ट कैसी होगी, ग्राफिक्स क्या होंगे और सवाल कैसे पूछे जाएंगे, इसका निर्णय संपादकीय टीम लेती है। ऐसे में केवल कैमरे पर समाचार पढ़ना या कार्यक्रम प्रस्तुत करना पत्रकारिता नहीं कहलाता।
उन्होंने कहा कि वास्तविक पत्रकारिता कैमरे के सामने नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे की मेहनत में होती है। उनके अनुसार, सच्चा पत्रकार वही है जो दस्तावेज़ों की जांच करे, सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से जानकारी जुटाए, अदालतों की फाइलें पढ़े, गांव-गांव जाकर तथ्यों की पुष्टि करे और बिना सत्यापन के खबर प्रसारित करने से इनकार कर सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी एंकर ने कभी फील्ड रिपोर्टिंग की भी है, तो यह आवश्यक नहीं कि वह उसकी खोजी क्षमता का परिणाम हो। कई बार ऐसे निर्णय चैनल प्रबंधन और टीआरपी की रणनीति के तहत लिए जाते हैं।
संजय सिन्हा ने हाल के आंदोलनों के दौरान कुछ टीवी पत्रकारों और एंकरों के विरोध का उल्लेख करते हुए कहा कि नई पीढ़ी अब स्टूडियो आधारित प्रस्तुति और जमीनी पत्रकारिता के बीच का अंतर समझने लगी है। उनके अनुसार, पत्रकारिता रोशनी, मेकअप या कैमरे से नहीं, बल्कि चरित्र, मेहनत और सच के प्रति प्रतिबद्धता से बनती है।
लेख के अंत में उन्होंने कहा कि समाचार प्रस्तोताओं के पास हमेशा यह विकल्प होता है कि वे किसी ऐसी सामग्री को पढ़ने से इनकार करें जिससे वे सहमत न हों, लेकिन इसके लिए पेशेवर साहस और सिद्धांतों पर अडिग रहने की आवश्यकता होती है। उनका मानना है कि जिन लोगों ने इस रास्ते को चुना, वे आज भी अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए जाने जाते हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)