मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; ओडिशा में रेड अलर्ट, असम में 6.5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
नई दिल्ली। देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राजस्थान और बंगाल की खाड़ी में बने दो कम दबाव के क्षेत्रों के प्रभाव से दिल्ली समेत 17 राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
दिल्ली में भारी बारिश के साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। राजधानी के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मेघालय और जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट लागू है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भी भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका जताई गई है।
ओडिशा में मौसम विभाग ने कटक, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, भद्रक, जाजपुर और क्योंझर जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय कम दबाव के क्षेत्र के कारण अत्यधिक भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ा दी है। खराब समुद्री मौसम को देखते हुए मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, जबकि बंदरगाहों पर स्थानीय चेतावनी संकेत (LAC-III) फहराए गए हैं।
सिक्किम के नामची जिले में भूस्खलन का मलबा हटाने के दौरान दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी राज्यों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
उधर असम में बाढ़ का संकट अभी भी बरकरार है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार राज्य के छह जिलों में करीब 6.55 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। सिवासागर सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां लगभग 2.9 लाख लोग प्रभावित हैं। इसके बाद चराइदेव और जोरहाट सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एक दिन में चार लोगों की मौत के साथ इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। छह जिलों में 274 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां करीब 18,900 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। राज्य के 810 गांव जलमग्न हैं, जबकि लगभग 34,971 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। दिखौ और धनसिरी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
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