मनसे कार्यकर्ताओं ने जलाईं हिंदी की किताबें, राज ठाकरे ने सरकार के फैसले पर फिर उठाए सवाल

महाराष्ट्र में केंद्र सरकार के तीन भाषा फार्मूले को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। राज्य की महायुति सरकार ने छात्रों के लिए हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाने की बाध्यता हटा दी है। इसके बाद मनसे प्रमुख राज ठाकरे और कुछ मराठी संगठनों ने सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है।

Thursday, June 19, 2025 - 15:25
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मनसे कार्यकर्ताओं ने जलाईं हिंदी की किताबें, राज ठाकरे ने सरकार के फैसले पर फिर उठाए सवाल

मुंबई (आरएनआई) महाराष्ट्र के स्कूलों में तीसरी भाषा को लेकर छिड़ा विवाद बढ़ रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने राज्य में जगह-जगह हिंदी की किताबें जलाईं। वहीं मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम स्कूलों में छात्रों को हिंदी नहीं पढ़ाने देंगे। 

महाराष्ट्र में केंद्र सरकार के तीन भाषा फार्मूले को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। राज्य की महायुति सरकार ने छात्रों के लिए हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाने की बाध्यता हटा दी है। अब प्रदेश के स्कूलों में कोई भी भारतीय भाषा तीसरी भाषा के रूप में चुनी जा सकती है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे और कुछ मराठी संगठनों ने सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है। 

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि एमपी और यूपी में कौन सी भाषा को तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाएंगे? मराठी राज्य भाषा है, तो यह भाषा क्यों थोप रहे हैं ? यूपी, बिहार और एमपी में तीसरी भाषा क्या मराठी सिखाएंगे? क्या गुजरात में भी तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी जरूरी नहीं होगी? राज ठाकरे के बयान के बाद मनसे कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। कार्यकर्ताओं ने स्कूलों में जाकर प्रधानाध्यापकों को पत्र दिए और हिंदी की किताबें जलाईं। दुकानों से भी हिंदी की किताब खरीद कर जलाई गईं।

इससे पहले बुधवार को महाराष्ट्र सरकार का एक सरकारी आदेश सामने आया। इसके मुताबिक अब राज्य के स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। यदि कोई छात्र किसी अन्य भाषा को सीखना चाहता है, तो स्कूल को कम से कम 20 इच्छुक छात्रों की आवश्यकता होगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली तीन दलों की गठबंधन सरकार ने जो नवीनतम गवर्नमेंट रिजोल्यूशन (GR) जारी किया है।

इस सरकारी आदेश के मुताबिक राज्य पाठ्यक्रम रूपरेखा स्कूल शिक्षा 2024 के अनुसार, अब से कक्षा 1 से 5 तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी अनिवार्य होगी। अन्य माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक तीन भाषाएं मराठी, अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाई जाएगी। कक्षा 6 से 10 के लिए भाषा नीति राज्य पाठ्यक्रम रूपरेखा-स्कूल शिक्षा के अनुसार होगी।

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