इथियोपिया ज्वालामुखी की राख से विमान सेवाएं प्रभावित, एयरलाइंस ने बदले रूट और योजनाएं; IMD ने दी स्थिति की जानकारी

Tuesday, November 25, 2025 - 15:31
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इथियोपिया ज्वालामुखी की राख से विमान सेवाएं प्रभावित, एयरलाइंस ने बदले रूट और योजनाएं; IMD ने दी स्थिति की जानकारी

नई दिल्ली (आरएनआई)। इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी से निकली राख का बादल पश्चिम एशिया होते हुए भारत के आसमान तक पहुंच गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। राख का गुबार लगभग 45,000 फीट तक फैला हुआ है, जो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सामान्य क्रूजिंग ऊंचाई है। इसी कारण कई एयरलाइंस ने रूट बदलने, उड़ानें रद्द करने और यात्रियों को वैकल्पिक विकल्प देने की घोषणा की है।

एयर इंडिया ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों को एसएमएस और ईमेल के माध्यम से लगातार अपडेट दिया जा रहा है। प्रभावित टिकटों पर पूरा रिफंड और बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के री-बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। एयरलाइन ने स्पष्ट किया है कि उड़ानों की योजना और संचालन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप ही किया जा रहा है और स्थिति पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

ज्वालामुखीय राख को देखते हुए DGCA ने सभी एयरलाइंस को कड़े निर्देश जारी किए हैं। विमान कंपनियों को ऐसे मार्ग चुनने के आदेश दिए गए हैं, जिनकी दिशा राख वाले वायुक्षेत्र से न गुजरती हो। इंजनों की विशेष जांच, अतिरिक्त ईंधन भरने, वैकल्पिक हवाई मार्ग अपनाने और जोखिम मूल्यांकन तंत्र को सक्रिय रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। हवाईअड्डों से कहा गया है कि रनवे, टैक्सीवे और एप्रन पर राख के निशान मिलने पर उड़ान संचालन रोक दिया जाए और सफाई पूरी होने के बाद ही उड़ानें शुरू की जाएं।

वहीं, इंडिगो और अकासा एयर ने भी कई उड़ानों को रद्द या डायवर्ट किया है। अकासा एयर ने जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं। यात्रियों को रिफंड या मुफ्त री-बुकिंग का विकल्प दिया गया है। वहीं इंडिगो की कन्नूर–अबू धाबी उड़ान (6E1433) को राख वाले क्षेत्र से बचाने के लिए अहमदाबाद की ओर मोड़ना पड़ा।

इधर, ज्वालामुखी की राख भारत के राजस्थान और गुजरात से होते हुए दिल्ली के ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच गई है, लेकिन मौसम विभाग ने कहा है कि यह राख जमीन की सतह से काफी ऊपर है, इसलिए वायु गुणवत्ता पर बड़े प्रभाव की संभावना कम है। निजी मौसम सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इस राख के गुबार में सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) की मात्रा ज्यादा पाई गई है, जबकि राख की सांद्रता मध्यम स्तर पर है।

हालात पर नजर बनाकर रखी जा रही है और विमानन क्षेत्र अलर्ट मोड पर है, क्योंकि राख के कण इंजन, सेंसर और विमान की सतह को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थिति सामान्य होते ही उड़ान संचालन में और सहजता आने की उम्मीद है।

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