हाथरस में बारिश ने खोली जलनिकासी व्यवस्था की पोल, सड़कें बनीं तालाब, लोगों का जनजीवन प्रभावित
हाथरस। जिले में हुई बारिश ने नगर की जलनिकासी व्यवस्था की एक बार फिर पोल खोल दी। सोमवार सुबह हुई हल्की से मध्यम बारिश के बाद ही शहर के कई मोहल्लों, कॉलोनियों और मुख्य बाजारों में जलभराव हो गया। निचले इलाकों की सड़कें तालाब जैसी दिखाई देने लगीं, जिससे लोगों को घरों से निकलने और आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 48 घंटों के दौरान हाथरस और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
शहर के अधिकांश इलाकों में जलभराव की समस्या देखने को मिली। स्टेट बैंक कॉलोनी, श्रीनगर, पंजाबी मार्केट, डाकखाना वाली गली, मोहनगंज और नगला तंदुला सहित कई क्षेत्रों में बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि नालों की नियमित सफाई, जलनिकासी नेटवर्क के विस्तार और जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उनका कहना है कि केवल अस्थायी सफाई अभियान चलाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत है।
मोहनगंज निवासी महेश कुमार ने बताया कि यह शहर का प्रमुख मार्ग होने के बावजूद वर्षों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। बारिश के दौरान यहां पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है और कई बार आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद लोगों को केवल आश्वासन ही मिला है।
वहीं, नगला तंदुला निवासी दुर्गेश कुमार ने बताया कि हल्की बारिश के बाद भी इलाके में पानी भर जाता है और उसे निकलने में तीन से चार दिन लग जाते हैं। लंबे समय तक पानी जमा रहने से गंदगी, बदबू और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। कई बार अधिक बारिश होने पर पानी लोगों के घरों तक पहुंच जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
मौसम विभाग ने 20 से 21 जुलाई के बीच जिले में भारी वर्षा की संभावना जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यदि समय रहते जलनिकासी व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आगामी बारिश के दौरान शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।
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