वरिष्ठ पत्रकारों की पेंशन सहित मांगों पर सरकार से कार्रवाई की अपील, प्रभात त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को लिखा खुला पत्र
प्रभात त्रिपाठी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) के संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक खुले पत्र में वरिष्ठ पत्रकारों की समस्याओं और पेंशन योजना लागू किए जाने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकार भले ही संवैधानिक संस्थाओं का हिस्सा न हों, लेकिन समाज तक सूचनाएं पहुंचाने और सरकार के कार्यों को जनता के सामने रखने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पत्र में उन्होंने पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए नारद मुनि, गणेश शंकर विद्यार्थी और बाबूराव विष्णु पराड़कर जैसे पत्रकारों का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि समय के साथ पत्रकारिता का स्वरूप बदला है, लेकिन आज ईमानदारी से काम करने वाले अनेक पत्रकार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और कई वरिष्ठ पत्रकारों के सामने आजीविका का भी संकट खड़ा है।
प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि बिहार सहित मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों में वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन योजनाएं लागू हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि बिहार सरकार ने वरिष्ठ पत्रकारों की पेंशन राशि बढ़ाई है तथा पत्रकार के निधन के बाद उनकी पत्नी को भी पेंशन देने का प्रावधान किया है। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश सरकार भी इसी प्रकार की योजना लागू करे।
पत्र में दावा किया गया है कि पिछले दो वर्षों के दौरान उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा, विधानसभा सत्र के दौरान भी यह मुद्दा उठाया और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार अवनीश अवस्थी को भी वरिष्ठ पत्रकार पेंशन योजना का प्रस्ताव सौंपा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में वरिष्ठ पत्रकार बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को सरकार प्राथमिकता नहीं दे रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पत्रकारों की समस्याओं पर तत्काल संवाद शुरू करने और वरिष्ठ पत्रकार पेंशन योजना की घोषणा करने की अपील की।
प्रभात त्रिपाठी ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो पुनर्गठित समिति हजारों पत्रकारों के साथ लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा परिसर में धरना देने तथा मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पर विचार कर सकती है। उन्होंने सरकार से पत्रकारों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।
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