लखनऊ के मलिहाबाद में मंदिर-मकबरा विवाद गहराया, पुलिस निगरानी में अदा हुई जुमे की नमाज
उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के मलिहाबाद क्षेत्र स्थित कसमंडी कला में मंदिर और मकबरे को लेकर विवाद गहरा गया है। पासी समाज और मुस्लिम समुदाय के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर रही। शुक्रवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जुमे की नमाज अदा कराई गई।
जानकारी के अनुसार, सामान्य दिनों में यहां 10 से 15 लोग नमाज पढ़ने पहुंचते थे, लेकिन विवाद के बाद शुक्रवार को करीब 200 से 210 लोग मौके पर पहुंचे। हालांकि दूसरे पक्ष की ओर से कोई प्रदर्शन नहीं किया गया। प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
पासी समाज का दावा है कि यह स्थल राजपासी राजा कंस का प्राचीन शिव मंदिर था, जिसे बाद में मकबरे में बदल दिया गया। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे पीढ़ियों पुराना धार्मिक स्थल और मकबरा बता रहा है। विवाद बढ़ने के बाद लाखन पासी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष Suraj Pasi ने जिलाधिकारी और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मामले की पुरातत्व विभाग से जांच कराने की मांग की है।
इतिहासकारों के हवाले से बताया जा रहा है कि 11वीं सदी के दौरान कसमंडी कंवलाहार क्षेत्र में राजपासी राजा कंस का शासन था। इसी दौर में सैयद सालार मसूद गाजी के अवध क्षेत्र में आने का भी उल्लेख मिलता है। पासी समाज का आरोप है कि ढांचे के भीतर बनी समाधि हाल के वर्षों में बनाई गई है और बाहर लगाया गया बोर्ड भी नया है। उनका कहना है कि ढांचे में नाग और कलश जैसी आकृतियां बनी हुई हैं, जो हिंदू मंदिर शैली की ओर संकेत करती हैं।
दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह स्थल लंबे समय से मकबरे के रूप में जाना जाता रहा है और यहां वर्षों से धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की जा रही है।
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