मसाने की होली पर विवाद: विरोध और धमकियों पर कपाली बाबा का तीखा जवाब, परंपरा के दमन पर उठाए सवाल
वाराणसी (आरएनआई) वाराणसी की प्राचीन और आध्यात्मिक पहचान से जुड़ा मसाने की होली का पर्व इस बार विवादों के केंद्र में है। कुछ लोगों द्वारा इस परंपरागत आयोजन का विरोध किए जाने और अघोरियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां तथा विष्ठा सेवन कराने जैसी धमकियां दिए जाने के बाद संत समाज में रोष देखा जा रहा है। इस पूरे प्रकरण पर कपाली बाबा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मसाने की होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि महादेव की नगरी की सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा और लोक आस्था का प्रतीक है।
कपाली बाबा ने स्पष्ट कहा कि मसाने की होली का संबंध सीधे भगवान शिव की उपासना और जीवन-मृत्यु के अद्वैत दर्शन से है। यह पर्व श्मशान की भूमि पर भी जीवन के उत्सव का संदेश देता है और मनुष्य को अहंकार से मुक्त होकर सत्य को स्वीकार करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि कुछ “जयचंदों” की मानसिकता के कारण काशी की परंपरा और उत्सव को बदनाम करने या दबाने की साजिश की जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि अघोर परंपरा सनातन धर्म की एक मान्य और प्राचीन साधना पद्धति है, जिसे समझे बिना उस पर टिप्पणी करना अज्ञानता का परिचायक है। मसाने की होली लोक पर्व है, जिसमें श्रद्धालु भस्म और रंग-गुलाल के साथ शिवत्व का उत्सव मनाते हैं। इसे विकृत रूप में प्रस्तुत करना काशी की सांस्कृतिक विरासत का अपमान है।
कपाली बाबा ने प्रशासन और समाज से अपील की कि परंपराओं का सम्मान किया जाए और असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम और वैमनस्य से बचा जाए। उन्होंने कहा कि काशी की आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर को किसी भी कीमत पर कुचला नहीं जा सकता। मसाने की होली सदियों से मनाई जाती रही है और आगे भी पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई जाती रहेगी।
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