मंत्रिपरिषद की मैराथन बैठक में नौकरशाही पर फोकस, पीएम मोदी ने पूछा- किस स्तर पर कितने दिन अटकती हैं फाइलें
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने विकसित भारत के लक्ष्य को तेज गति से आगे बढ़ाने और नौकरशाही को अधिक जवाबदेह एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद की एक अहम मैराथन बैठक की। करीब पांच घंटे तक चली इस बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों में लंबित फाइलों, मुकदमों और अधिकारियों के विदेशी दौरों तक की विस्तृत जानकारी ली।
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान प्रधानमंत्री को विभिन्न मंत्रालयों की ओर से प्रस्तुति दी गई, जिसमें बताया गया कि संयुक्त सचिव, सचिव और राज्य मंत्रियों के स्तर पर फाइलें औसतन कितने दिनों तक लंबित रहती हैं। पीएम मोदी ने यह भी जाना कि किन स्तरों पर काम में सबसे ज्यादा देरी हो रही है और उसे कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
बैठक में मंत्रालयों से जुड़े लंबित मुकदमों की भी समीक्षा की गई। प्रस्तुति में यह जानकारी दी गई कि कौन-सा मंत्रालय पुराने मामलों को खत्म कराने के लिए किस स्तर पर प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही अधिकारियों के विदेशी दौरों का ब्यौरा भी प्रधानमंत्री के सामने रखा गया। बताया गया कि किन अधिकारियों ने निर्धारित सीमा से अधिक विदेश यात्राएं कीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में अपनी सरकार को “सुधार एक्सप्रेस” की सरकार बताते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल तेज और प्रभावी सुधारों के जरिए ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे “सुधार उत्सव” मनाएं और प्रशासनिक सुधारों को जनसुविधा से जोड़ें। पीएम ने कहा कि सुधारों का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों की परेशानियों को कम करना होना चाहिए।
बैठक के दौरान Ministry of Power, Ministry of Health and Family Welfare, Ministry of Labour and Employment, Ministry of Commerce and Industry और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय समेत 11 मंत्रालयों ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और प्रशासनिक सुधारों को लेकर अपनी प्रस्तुति दी। इन मंत्रालयों ने बताया कि प्रक्रियाओं को सरल बनाने और कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की क्या योजनाएं हैं।
बैठक में हाल के विधानसभा चुनावों में मिली सफलता को लेकर भी चर्चा हुई और कई मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक सरकार के भीतर जवाबदेही बढ़ाने और प्रशासनिक गति तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
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