ब्रह्मा, विष्णु और महेश का समाहित रूप होता है गुरु:-महात्मा विद्युतानन्द
हरदोई।गुरु के बिना संसार में आज तक किसी को भी ज्ञान नहीं हुआ। ब्रह्मा, विष्णु और महेश का समाहित रूप होता है गुरु। यह बात मानव उत्थान सेवा समिति के श्रीं हँस योग आश्रम मे रविवार को गुरु पूर्णिमा पर्व पर प्रवचन करते हुए आश्रम प्रभारी और सदगुरुदेव सतपाल महाराज की शिष्य महात्मा विद्युतानन्द जी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि गुरु पूजा जिसे व्यास पूजा भी कहा जाता है। असाढ मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।सम्पूर्ण सनातन संस्कृति में मनाया जाने वाला सदगुरु को समर्पित गुरु भक्ति का पावन पर्व है। सदगुरु मानव चोले में भगवान के प्रत्यक्ष स्वरूप माने जाते हैं। गुरु ही ऐसे दाता हैं जो साधारण मानव को अपनी कृपा शक्ति और निर्देशों से ध्यान व योग की विधि सिखाकर ईश्वर दर्शन के लिए सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाते हैं।सच्चे तत्वज्ञानी सदगुरु मानव के नश्वर शरीर में भृकुटि के मध्य में दिव्य प्रकाश स्वरूप विराजमान सच्चिदानन्द परमात्मा का बोध कराकर मानव की चेतना को ऊपर की ओर ऊर्ध्वगामी कर देते हैं।मानव में तीव्र विवेक और आत्मिक सुख का विकास होना शुरू हो जाता है।
तभी महात्मा रामखेलावन ने कहा कि गुरु वो हैं।जो जीव को पापों और विकारों से मुक्त कर सकते हैं और मन को भगवान की भक्ति लगा कर परम प्रकाश से जोड़ सकते हैं। उनकी कृपा से मन के द्वार द्वार खुल जाते हैं और चंचल मन प्रभु में विलीन हो जाता है। तब मानव का जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्म को जानने से मानव का जीवन सार्थक होगा है।
इस मौके पर रामनाथ,ओमप्रकाश रस्तोगी,शिवम गुप्ता, रमाकांत चौरसिया, कपिल,रामसहारे,सौम्या गुप्ता,शिवानी वर्मा,बविता, पूनम, उषा मिश्रा मौजूद रही।
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