बरनाला रैली के सियासी मायने: भाजपा और मोदी पर हमलावर रहे राहुल, AAP पर चुप्पी से बढ़ी अटकलें
चंडीगढ़ (आरएनआई)। पंजाब के बरनाला में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। रैली के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला, लेकिन राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी का नाम तक नहीं लिया। इस चुप्पी को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में भारत-अमेरिका ट्रेड डील और उसके किसानों व व्यापारियों पर संभावित प्रभाव का मुद्दा उठाया। हालांकि उन्होंने पंजाब का जिक्र जरूर किया, लेकिन राज्य से जुड़े किसी विशेष स्थानीय मुद्दे या समस्या पर विस्तार से बात नहीं की। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने इसी बात को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है।
पंजाब भाजपा के नेताओं ने आरोप लगाया कि बरनाला रैली में किसानों, मजदूरों और मनरेगा में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को नजरअंदाज किया गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ दल के प्रति नरम रुख अपना रही है। उधर, पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान को अपने ही नेताओं को सार्वजनिक मंच से नसीहत देनी पड़ रही है, जो संगठनात्मक कमजोरी को दर्शाता है।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी तंज कसते हुए कहा कि रैली में पंजाब के लिए कोई ठोस एजेंडा नहीं था और राहुल गांधी राज्य में केवल कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद सुलझाने आए थे।
दरअसल, रैली के दौरान राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि आगामी चुनावों में गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो नेता टीम भावना से काम नहीं करेगा, उसे संगठन में जगह नहीं मिलेगी। सूत्रों के अनुसार, पंजाब में कई नेता खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानते हैं और इसी कारण अंदरूनी खींचतान चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू जैसे नेताओं के बयान भी समय-समय पर चर्चा में रहे हैं।
इसी संदर्भ में राहुल गांधी का सख्त संदेश संगठनात्मक अनुशासन स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने यह भी तय किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव बिना किसी घोषित मुख्यमंत्री चेहरे के लड़ा जाएगा और परिणाम के बाद ही नेतृत्व पर फैसला होगा।
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि उन्हें पार्टी नेताओं को फटकार लगानी थी तो दिल्ली में बुलाकर दे सकते थे। उन्होंने इसे सार्वजनिक मंच से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने वाला कदम बताया।
कुल मिलाकर, बरनाला रैली ने पंजाब की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा और अकाली दल जहां कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों से पहले संगठन को एकजुट करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
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