गुना स्टेशन पर निर्माण कार्य की आड़ में यात्रियों के अधिकारों का हनन, सुनील आचार्य ने उठाई आवाज

Thursday, April 30, 2026 - 13:10
Updated: 3 months ago
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गुना स्टेशन पर निर्माण कार्य की आड़ में यात्रियों के अधिकारों का हनन, सुनील आचार्य ने उठाई आवाज

गुना (आरएनआई) गुना रेलवे स्टेशन पर चल रहे अमृत निर्माण कार्य को लगभग दो वर्ष होने जा रहे हैं। करीब साढ़े अट्ठाईस करोड़ रुपये की लागत से स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना है, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति अब यात्रियों के लिए भारी परेशानी का कारण बनती जा रही है। भीषण गर्मी में यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक न मिल पाने से हालात चिंताजनक हो गए हैं।

यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन पर एक और पूरा खुला पडा है खुले आसमान मे इस भीषण गर्मी धूप और गर्म हवा मे वाहर बैठना पड रही हैऔर न ही प्रतीक्षालय की सुविधा उपलब्ध है। प्रथम श्रेणी का प्रतीक्षालय लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है, जिस कारण रोजाना दर्जनों यात्री असुविधा झेलने को मजबूर हैं।

हाल ही में एक यात्री परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार को अजमेर के लिए यात्रा करनी थी, लेकिन उनकी ट्रेन करीब पांच घंटे लेट हो गई। समय पर स्टेशन पहुंचने के बावजूद उन्हें तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच खुले में ही इंतजार करना पड़ा, क्योंकि प्रथम श्रेणी प्रतीक्षालय बंद था। परिवार के साथ छोटे बच्चे भी थे, जिससे स्थिति और कठिन हो गई।

इस पूरे मामले को सुनील आचार्य ने गंभीरता से उठाया। यात्री द्वारा साझा किए गए वीडियो के आधार पर आचार्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से संबंधित अधिकारियों और वरिष्ठ रेल प्रशासन को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जब कोई यात्री टिकट आरक्षण कराता है, तो उसे रेलवे मानकों के अनुसार प्रतीक्षालय जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलना उसका अधिकार है।

आचार्य ने सवाल उठाया कि आखिर प्रथम श्रेणी प्रतीक्षालय में ऐसा कौन-सा कार्य चल रहा है, जो दो वर्षों में भी पूरा नहीं हो सका। उन्होंने मांग की कि यदि कक्ष का कार्य अधूरा है, तो प्रथम श्रेणी के यात्रियों के लिए वीआईपी कक्ष खोला जाए या कोई वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने रेल प्रशासन से जल्द से जल्द प्रतीक्षालय को चालू करने और यात्रियों को राहत देने की अपील की है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का भी कहना है कि निर्माण कार्य की आड़ में सुविधाओं की अनदेखी करना यात्रियों के अधिकारों का सीधा हनन है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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