नालंदा सिपाही हत्याकांड: पुष्पा कुमारी पर गंभीर आरोप, कथित अवैध नेटवर्क और संपत्ति की जांच की मांग
बिहार के नालंदा में मद्यनिषेध विभाग के सिपाही अजीत कुमार की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुरुआत में घटना को शराब तस्करों की गोलीबारी से जोड़कर देखा गया था, लेकिन पुलिस की जांच में सामने आया कि अजीत को उनकी ही टीम में शामिल होमगार्ड जवान की राइफल से गोली लगी थी। मामले में महिला सब-इंस्पेक्टर पुष्पा कुमारी समेत सात लोगों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई है। पुलिस अब घटना की परिस्थितियों, कथित साक्ष्य छिपाने और अधिकारियों को दी गई जानकारी की पड़ताल कर रही है।
इसी बीच पुष्पा कुमारी के पूर्व सहयोगियों के हवाले से उनके कथित निजी नेटवर्क, अवैध वसूली और संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन दावों के मुताबिक, वह अपनी आधिकारिक टीम से अलग निजी लोगों का समूह रखती थीं और शराब कारोबारियों के ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान इस समूह का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच एजेंसियों की ओर से इनके संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
पूर्व सहयोगियों के कथित दावों में यह भी कहा गया है कि शराब की खेप पकड़े जाने के बाद कथित तौर पर पैसे लेकर मामले निपटाने और जब्त शराब से जुड़े अवैध लेनदेन का नेटवर्क चलाया जाता था। एक मामले में वाहन छोड़ने के बदले 20 लाख रुपये तक लिए जाने का दावा भी किया गया है। इसके अलावा, शराब पीने के आरोप में पकड़े गए लोगों के परिजनों से पैसे वसूलने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन दावों को फिलहाल पुष्ट तथ्य के बजाय आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि पुष्पा कुमारी राजगीर में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से रिसॉर्ट बनाने की तैयारी कर रही थीं। कथित तौर पर उनके पूर्व सहयोगियों ने उनकी संपत्ति और आय के स्रोतों की जांच की मांग उठाई है। हालांकि, रिसॉर्ट की योजना, उसकी अनुमानित लागत और कथित अवैध कमाई के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अजीत कुमार की मौत के मामले में पुलिस की विशेष जांच टीम घटना के दौरान गोली चलने की परिस्थितियों, संबंधित कर्मियों की भूमिका और कथित साक्ष्य छिपाने के पहलुओं की जांच कर रही है। अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां सामने आए अन्य आरोपों की पुष्टि के लिए वित्तीय लेनदेन, संपत्ति और कथित नेटवर्क से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करती हैं या नहीं। जांच पूरी होने और अदालत में तथ्य सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
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