अंकिता भंडारी हत्याकांड: दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर विवाद, कांग्रेस ने उठाए सवाल
देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति विवादों में घिर गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच पूरी होने से पहले उन्हें संवैधानिक पद पर नियुक्त करना जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है।
अंकिता भंडारी 19 वर्षीय युवती थीं, जो ऋषिकेश के वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी और चार दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, मामले में एक कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
यह विवाद उस समय फिर तेज हुआ, जब कुछ ऑडियो क्लिप और बयानों के आधार पर कथित वीआईपी के रूप में दुष्यंत गौतम का नाम चर्चा में आया। अंकिता के परिवार और कांग्रेस नेताओं ने इस पहलू की निष्पक्ष जांच की मांग की है। गौतम ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत या जांच एजेंसी द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने गौतम की नियुक्ति के विरोध में देहरादून में प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि राज्यपाल का पद उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचाने का माध्यम बन सकता है। कांग्रेस नेताओं ने सीबीआई जांच की गति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कथित वीआईपी पहलू की जांच में अब तक पर्याप्त प्रगति सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है और इस संबंध में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और सीबीआई जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति रोकने का आग्रह किया था। राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि अंकिता के परिवार को अब तक कथित वीआईपी की पहचान को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत प्राप्त संरक्षण के कारण उनके पद पर रहते हुए आपराधिक कार्यवाही शुरू करने या जारी रखने पर संवैधानिक बाधाएं हो सकती हैं।
अंकिता के माता-पिता ने भी नियुक्ति पर रोक लगाने और मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की थी। परिवार ने चेतावनी दी थी कि मांगें नहीं मानी गईं तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। 19 अक्टूबर को दुष्यंत गौतम ने सिक्किम के राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली। ऐसे में अब विवाद का केंद्र यह है कि कथित वीआईपी पहलू की जांच किस तरह आगे बढ़ती है और परिवार को अपने सवालों के जवाब मिलते हैं या नहीं।
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