2019 हनीट्रैप की मास्टरमाइंड फिर सक्रिय: जेल से निकलते ही बनाया नया ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट, पुलिस-मीडिया कनेक्शन भी उजागर

Wednesday, May 20, 2026 - 15:41
Updated: 2 months ago
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2019 हनीट्रैप की मास्टरमाइंड फिर सक्रिय: जेल से निकलते ही बनाया नया ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट, पुलिस-मीडिया कनेक्शन भी उजागर

इंदौर_भोपाल(आरएनआई)साल 2019 के कुख्यात हनीट्रैप कांड की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन (भोपाल) ने जेल से बाहर आते ही ब्लैकमेलिंग का एक और खौफनाक नेटवर्क खड़ा कर दिया है। इस बार उसने शराब कारोबारी हितेंद्रसिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर से एक करोड़ रुपये वसूलने के लिए एक हाई-प्रोफाइल गिरोह तैयार किया था, जिसका पुलिस ने सनसनीखेज भंडाफोड़ किया है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस नए गैंग की स्क्रिप्ट मध्य प्रदेश की जिला जेल के भीतर लिखी गई थी। जब श्वेता जैन पुराने हनीट्रैप मामले में जेल में बंद थी, तभी उसकी मुलाकात शराब तस्करी के आरोप में बंद अलका दीक्षित से हुई। जेल की सलाखों के पीछे शुरू हुई यह दोस्ती जमानत पर बाहर आते ही एक शातिर ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट में बदल गई, जो पिछले दो सालों से बड़े-बड़े नेताओं और रसूखदार कारोबारियों को अपनी जाल में फंसाकर मोटी रकम वसूल रहा था।

इस संगठित गिरोह का नेटवर्क कितना मजबूत था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें सत्ताधारी दल के कथित नेता से लेकर पुलिस और मीडिया के लोग तक शामिल थे। डीसीपी (अपराध) राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, मुख्य आरोपी श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित को गिरफ्तार कर छह दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। इस गैंग में शामिल लाखन चौधरी खुद को बीजेपी का पदाधिकारी बताकर प्रॉपर्टी डीलिंग की आड़ में अमीर शिकार तलाशता था। वहीं, देवास का जितेंद्र पुरोहित खुद को मीडियाकर्मी बताकर अलका को ब्लैकमेलिंग और वसूली के कानूनी दांव-पेंच समझाता था।

इस पूरे सिंडिकेट में खाकी की मिलीभगत ने भी सबको चौंका दिया है। चिंटू ठाकुर को हनीट्रैप के जाल में फंसाने के बाद अलका दीक्षित ने सीधे इंटेलिजेंस विंग में तैनात हेड कांस्टेबल (प्रधान आरक्षक) विनोद शर्मा से संपर्क साधा था और पीड़ित के आपत्तिजनक फोटो भी शेयर किए थे। पुलिस पूछताछ में इस पुलिसकर्मी ने अलका से सांठगांठ की बात कबूल कर ली है। जांच अधिकारियों का कहना है कि श्वेता जैन के इस नए जाल में कई ऐसे दिग्गज राजनेता और उद्योगपति भी फंस चुके हैं, जो खुशनसीबी से 2019 के कांड में बच गए थे। फिलहाल बदनामी और समाज के डर से कई बड़े पीड़ित सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन पुलिस रिमांड के दौरान इस गिरोह के मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स से कई और सफेदपोशों के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है।

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