टीवी न्यूज़ चैनलों के असाइनमेंट सिस्टम पर उठे सवाल, फील्ड पत्रकारों के शोषण के आरोप
नई दिल्ली। टीवी न्यूज़ इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए गए हैं। एक टिप्पणी में दावा किया गया है कि फील्ड में काम कर रहे अधिकांश टीवी पत्रकार और कैमरामैन इस बात से सहमत हैं कि उन्हें चैनल प्रबंधन द्वारा अपनी पूर्व-स्वीकृत (Pre-Approved) स्टोरी पर भी स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया जाता।
दावे के अनुसार, चैनलों के इनपुट एडिटर प्रतिदिन रिपोर्टरों से अगले दिन की संभावित खबरों का डे-प्लान मांगते हैं। पत्रकार शोध के आधार पर जनहित और राष्ट्रीय महत्व से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग के सुझाव देते हैं। इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर उन्हें कैमरा टीम, ब्रॉडकास्ट उपकरण और शूटिंग के लिए वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं।
हालांकि, आरोप है कि फील्ड में पहुंचने के बाद कई पत्रकारों को दफ्तर से लगातार निर्देश दिए जाते हैं और उन्हें मूल रिपोर्टिंग के बजाय पूर्व निर्धारित एजेंडे के अनुरूप इंटरव्यू और सामग्री जुटाने के लिए कहा जाता है। टिप्पणी में यह भी दावा किया गया है कि कुछ चुनिंदा लोग संपादकीय निर्णयों को प्रभावित कर चैनल की नीतियों को अपने हितों के अनुसार संचालित करते हैं।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि न्यूज़रूम में पक्षपात (फेवरिटिज्म) के कारण कुछ पत्रकारों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है, जबकि अन्य पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार होता है। साथ ही महिला पत्रकारों के शोषण और दबावपूर्ण कार्य वातावरण जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
इसके अलावा, टिप्पणी में यह भी दावा किया गया है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन, एडिटिंग, ग्राफिक्स और अन्य तकनीकी टीमों के कर्मचारियों के साथ वेतन संबंधी असमानता बरती जाती है और संसाधनों का लाभ चुनिंदा एंकरों को अधिक मिलता है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित समाचार चैनलों या संस्थानों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि इन दावों के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं, तो यह मीडिया उद्योग की कार्यप्रणाली और संपादकीय स्वतंत्रता पर गंभीर बहस का विषय बन सकता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)