अचला सप्तमी पर प्रयागराज में आस्था का सैलाब, 40–50 लाख श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान; मेला क्षेत्र नो व्हीकल जोन

Sunday, January 25, 2026 - 11:49
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अचला सप्तमी पर प्रयागराज में आस्था का सैलाब, 40–50 लाख श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान; मेला क्षेत्र नो व्हीकल जोन

प्रयागराज (आरएनआई) अचला सप्तमी के पावन अवसर पर संगम नगरी प्रयागराज एक बार फिर आस्था के विराट उत्सव की साक्षी बनने जा रही है। मेला प्रशासन के अनुसार इस दिन 40 से 50 लाख श्रद्धालुओं के संगम सहित गंगा-यमुना के 24 से अधिक घाटों पर स्नान करने का अनुमान है। वसंत पंचमी के स्नान के बाद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अभी मेला क्षेत्र के शिविरों में ठहरे हुए हैं और अचला सप्तमी स्नान के बाद ही वापसी करेंगे, जिससे भीड़ और बढ़ने की संभावना है।

भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतज़ाम किए हैं। श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही और भीड़ नियंत्रण के लिए मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है। पुलिस प्रशासन के अनुसार रविवार सुबह चार बजे से मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार के सामान्य वाहन के प्रवेश पर रोक रहेगी। केवल एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़े करें।

मेलाधिकारी ऋषिराज ने बताया कि महाराष्ट्र, बिहार, नेपाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए घाटों पर अतिरिक्त बैरिकेडिंग, पुलिस बल की तैनाती, लाउडस्पीकर से लगातार घोषणाएं और खोया-पाया केंद्रों की व्यवस्था की गई है। पांटून पुल संख्या एक और दो को विशेष रूप से रिजर्व रखा गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर भीड़ को डायवर्ट किया जा सके।

अचला सप्तमी का धार्मिक महत्व भी विशेष है। माघ मास की सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी कहा जाता है और इस दिन सूर्यदेव की विधिवत पूजा का विधान है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर स्नान, दान और पूजा करते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत में मसूर की दाल, गाजर तथा नशीले पदार्थों के सेवन से परहेज किया जाता है। शनिवार को भी संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई, जहां लोगों ने त्रिवेणी में स्नान कर दीपदान किया। हालांकि कोहरे और धुंध के कारण सूर्यदेव के स्पष्ट दर्शन नहीं हो सके।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पांटून पुलों और पार्किंग की विस्तृत व्यवस्था की गई है। परेड से झूंसी जाने के लिए पांटून पुल संख्या तीन, पांच और सात का उपयोग किया जाएगा, जबकि झूंसी से परेड आने के लिए पुल संख्या चार और छह निर्धारित हैं। अलग-अलग दिशाओं से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्लॉट नंबर-17, गल्ला मंडी, नागवासुकि और ओल्ड जीटी कछार पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं, जहां से पैदल मार्गों के जरिए संबंधित स्नान घाटों तक पहुंचने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों और निर्देशों का पालन करें, ताकि अचला सप्तमी का यह पावन पर्व सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

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