सुप्रीम कोर्ट में छात्र प्रदर्शन मामलों पर सुनवाई, CJI सूर्य कांत बोले- युवाओं से संयम और संवाद जरूरी
छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग से जुड़े मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि यदि केवल राजनीतिक निर्णय के आधार पर आपराधिक मामले वापस लिए गए, तो इससे भविष्य में गलत मिसाल बनेगी।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील रिजवान अहमद ने अदालत में कहा कि यदि ऐसे मामलों को बिना जवाबदेही तय किए वापस लिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह गलत संदेश होगा। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, "आज जेनरेशन जेड है, कल जेनरेशन अल्फा, बीटा और आगे की पीढ़ियां भी होंगी।" उनका तर्क था कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान यदि हिंसा या अप्रिय घटनाएं होती हैं, तो उसके लिए आयोजकों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
वकील ने अदालत को बताया कि हालिया छात्र आंदोलन मंत्री और पुलिस की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर था, लेकिन प्रदर्शन के आयोजकों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ आयोजक लगातार भड़काऊ बयान दे रहे हैं और मामले को शांत करने के बजाय विवाद बढ़ा रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस याचिका को छात्र प्रदर्शनों से जुड़े अन्य मामलों के साथ जोड़ दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि युवाओं के साथ सख्ती के बजाय संयम और संवाद की आवश्यकता है तथा ऐसे मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों को केवल राजनीतिक समझौते के आधार पर वापस न लिया जाए। अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ करने का निर्णय लिया।
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