संकट काल में राष्ट्रहित सर्वोपरि, राजनीति से ऊपर उठने का समय
वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकान्त पाठक ने अपने लेख में वैश्विक संकट, बढ़ती महंगाई और पश्चिमी एशिया में युद्ध जैसे हालातों के बीच देश में राजनीतिक एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों जरूरी हैं, लेकिन राष्ट्रीय संकट के समय राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
लेख में पश्चिमी एशिया के तनाव, तेल कीमतों में संभावित वृद्धि और उसके भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख करते हुए आम जनता पर महंगाई के खतरे को रेखांकित किया गया है। साथ ही राजनीतिक दलों से आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की गई है।
लेखक ने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों को मिलकर आर्थिक स्थिरता, रोजगार सुरक्षा और जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता बदलती रहती है, लेकिन राष्ट्र स्थायी होता है, इसलिए कठिन समय में राष्ट्रीय एकता ही सबसे बड़ी ताकत है।
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