शाहाबाद: ग्राम पंचायत नरसियामऊ में विकास निधि में बंदरबांट, सेक्रेटरी ने प्रधान के निजी खाते में लाखों का भुगतान किया
शाहाबाद, हरदोई। विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही के सरकारी दावों के बीच विकास खंड शाहाबाद की ग्राम पंचायत नरसियामऊ में विकास निधि के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव ने वित्तीय नियमों को दरकिनार करते हुए विभिन्न कार्यों के नाम पर सरकारी धनराशि सीधे प्रधान के निजी खाते में स्थानांतरित कर दी। इससे न केवल शासनादेशों की अनदेखी हुई, बल्कि पूरे भुगतान तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 में गौशाला में खाई खुदाई के नाम पर बड़े पैमाने पर धन निकासी की गई। अभिलेख बताते हैं कि जेसीबी कार्य के नाम पर पहले राशिद के खाते में ₹25,000 और ₹72,100 का भुगतान किया गया। इसके बाद उसी कार्य के नाम पर अलग-अलग बाउचर और तिथियों के माध्यम से ग्राम प्रधान के निजी खाते में क्रमशः ₹56,000, ₹30,000, ₹40,000, ₹30,000, ₹26,100 और ₹9,000 स्थानांतरित कर दिए गए। इस तरह सिर्फ एक कार्य के नाम पर प्रधान के खाते में ₹1,82,100 की धनराशि भेजी गई।इसके अलावा मिस्त्री, लेबर व अन्य भुगतान भी अलग-अलग मदों में दर्शाए गए हैं, जिससे कुल निकासी लाखों रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन कार्यों के नाम पर भुगतान दिखाया गया, वे धरातल पर स्पष्ट रूप से नजर नहीं आते, जबकि कागजों में भुगतान पूर्ण दर्शा दिया गया है। नियमों के अनुसार किसी भी विकास कार्य में लेबर, मिस्त्री या अन्य सामग्री से संबंधित भुगतान सीधे संबंधित फर्म, आपूर्तिकर्ता या कार्य करने वाले के बैंक खाते में किया जाना चाहिए, ताकि भुगतान की पारदर्शिता बनी रहे और कार्य का सत्यापन संभव हो सके। लेकिन ग्राम पंचायत नरसियामऊ में लेबर-मिस्त्री और सामग्री भुगतान के नाम पर धनराशि सीधे ग्राम प्रधान के निजी खाते में भेजी गई, जो वित्तीय नियमों के विपरीत माना जा रहा है। अनियमितताओं का सिलसिला यहीं नहीं रुका। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। अभिलेखों के अनुसार कम्प्यूटर मरम्मत के नाम पर ₹10,500 और गौशाला में तिरपाल खरीद के नाम पर ₹8,000 की धनराशि सीधे ग्राम प्रधान कश्मीर सिंह के निजी खाते में भेजी गई। बताया जा रहा है कि यह भुगतान पंचायत सचिव सुबोध कुमार गुप्ता द्वारा किया गया। लगातार अलग-अलग वित्तीय वर्षों में निजी खातों में भुगतान किए जाने से ग्राम पंचायत नरसियामऊ में विकास निधि के उपयोग पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। जीरो टॉलरेंस नीति के बीच सामने आई यह अनियमितता प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठाती है। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मामले की गहन जांच कराई जाए तो और भी वित्तीय अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। क्या बोले जिला पंचायत राज अधिकारी ? जिला पंचायत राज अधिकारी विनय कुमार का कहना है कि ऐसा मामला उनके संज्ञान में नहीं है अगर ऐसा है तो जांच कर कर दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अवश्य की जाएगी।
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