भारत की समुद्री ताकत को नई धार: नौसेना में शामिल हुआ INS तारागिरी, राजनाथ सिंह बोले—हम जिम्मेदार समुद्री शक्ति
विशाखापत्तनम (आरएनआई) भारत की समुद्री सुरक्षा और सैन्य क्षमता को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए स्वदेशी अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही आईएनएस अरिदमन को भी नौसेना में शामिल किया गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।
नेवल डॉकयार्ड में आयोजित इस भव्य समारोह में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएनएस तारागिरी के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ताकत, उसकी प्रतिबद्धता और संचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक अपनी सक्रिय उपस्थिति बनाए रखती है और हर संकट के समय राहत एवं बचाव अभियानों में अग्रणी भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि यह नौसेना केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि भारत के मूल्यों और जिम्मेदारियों का प्रतीक भी है।
आईएनएस तारागिरी की क्षमताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह अत्याधुनिक युद्धपोत ब्रह्मोस और अन्य सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है, जो इसे और अधिक शक्तिशाली बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि कोई भी देश मजबूत नौसेना के बिना वैश्विक शक्ति नहीं बन सकता।
रक्षा मंत्री ने समुद्री सुरक्षा के व्यापक पहलुओं पर जोर देते हुए कहा कि भारत को केवल अपने तटीय क्षेत्रों की रक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, रणनीतिक चोक पॉइंट्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना इन सभी क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब तनाव की स्थिति बनी है, भारतीय नौसेना ने वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। यही क्षमता भारत को एक विश्वसनीय और जिम्मेदार समुद्री शक्ति बनाती है।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना में नौसेना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और समुद्री मार्गों पर निर्भर व्यापार एवं ऊर्जा सुरक्षा को देखते हुए एक मजबूत नौसेना देश की अनिवार्य आवश्यकता है।
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