'पाकिस्तान मध्यस्थ नहीं, सिर्फ पोस्टमैन', एमजे अकबर का बयान; भारत को बताया बराबरी का साझेदार
नई दिल्ली (आरएनआई)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता की पेशकश पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एम.जे. अकबर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान किसी भी तरह का वास्तविक मध्यस्थ नहीं है, बल्कि सिर्फ “पोस्टमैन” या “कूरियर” की भूमिका निभा रहा है, जो केवल संदेश पहुंचाने का काम करता है।
एम.जे. अकबर के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच असली बातचीत सीधे तौर पर होती है, जबकि पाकिस्तान केवल एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का पाकिस्तान पर भरोसा उसकी पुरानी रणनीतिक साझेदारी की वजह से है, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका का सहयोगी रहा है।
उन्होंने भारत की स्थिति को इससे अलग बताते हुए कहा कि भारत एक स्वतंत्र नीति वाला देश है, जो अपने फैसले खुद लेता है और अमेरिका के साथ बराबरी के स्तर पर संबंध रखता है। अकबर ने यह भी कहा कि अमेरिका पाकिस्तान को एक आज्ञाकारी सहयोगी के रूप में देखता है, जबकि भारत के साथ उसके रिश्ते संतुलित और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं।
दरअसल यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में कहा था कि यदि अमेरिका और ईरान चाहें तो पाकिस्तान शांति वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है। पाकिस्तान ने खुद को इस संकट में मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की थी।
हालांकि दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वह अपनी शर्तों के अनुसार ही किसी भी निर्णय पर पहुंचेगा। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वह जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा।
इसी बीच खबर है कि अमेरिका ने ईरान के सामने युद्ध समाप्त करने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक स्तर पर भी देखा जा रहा है, खासकर तेल और ऊर्जा आपूर्ति पर, जिससे कई देशों में चिंता बढ़ गई है।
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