दीक्षांत केवल डिग्री नहीं, नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। समारोह में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, एनसीसी के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर गौरव गौतम, कुलपति प्रो. वंदना सिंह सहित विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मेधावी छात्र-छात्राओं को 83 स्वर्ण पदक तथा 339 शोधार्थियों को पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की गईं।

अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देना होना चाहिए। अर्जित ज्ञान तभी सार्थक होगा, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि आज देश की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, प्रशासन, न्यायपालिका और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। यह विकसित भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार, अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और महिला सशक्तीकरण जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने पर वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य अवश्य प्राप्त होगा।

शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे माता-पिता, गुरुजनों और विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार भी उतने ही आवश्यक हैं। बड़ी संख्या में छात्राओं द्वारा स्वर्ण पदक प्राप्त करना गर्व की बात है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा का उपयोग उत्तर प्रदेश और देश के विकास के लिए करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश
एनसीसी के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर गौरव गौतम ने कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन की नई यात्रा का प्रारंभ है। उन्होंने विद्यार्थियों से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने, ईमानदारी, सदाचार और अनुशासन का पालन करने की अपील की। साथ ही तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने, सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रयोग से बचने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।
नशामुक्त समाज बनाने की अपील

राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि शराब और मादक पदार्थों की लत समाज और परिवार दोनों के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं का स्वस्थ, अनुशासित और जिम्मेदार होना आवश्यक है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परिवार में पिछले चार दशकों से चाय नहीं बनती और अतिथियों का स्वागत नींबू पानी से किया जाता है।
मेस के भोजन और छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर जताई चिंता
राज्यपाल ने छात्रावासों के मेस में भोजन की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को नियमित जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, एक्सपायरी डेट और शुद्धता की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
विश्वविद्यालय की कमियों पर भी किया ध्यान आकर्षित
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने छात्रावासों में सफाई, प्रकाश व्यवस्था, वाशिंग मशीन और कपड़े सुखाने जैसी सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कारगिल विजय दिवस पर विश्वविद्यालय में कार्यक्रम आयोजित न होने पर नाराजगी जताते हुए कुलपति से जवाब मांगा। साथ ही परिसर की मूलभूत सुविधाओं में शीघ्र सुधार के निर्देश दिए।
डीजी लॉकर से बढ़ी पारदर्शिता
राज्यपाल ने कहा कि डीजी लॉकर व्यवस्था लागू होने से अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों में होने वाली त्रुटियों के सुधार में पारदर्शिता आई है तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है। उन्होंने गुजरात में शिक्षामंत्री रहने के दौरान फर्जी डिग्रियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल व्यवस्था शिक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बना रही है।
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