जवाहरबाग कांड के शहीदों को अब भी इंतजार: मथुरा में शहीद स्मारक और सिटी पार्क बनाने की उठी मांग
मथुरा के इतिहास में दर्ज चर्चित जवाहरबाग कांड को वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन इस घटना में शहीद हुए पुलिस अधिकारियों और जवानों की स्मृति में अब तक कोई भव्य शहीद स्मारक नहीं बन सका है। सामाजिक और कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने एक बार फिर इस मुद्दे को उठाते हुए शहीदों के सम्मान में स्मारक और जनसामान्य के लिए सिटी पार्क विकसित करने की मांग की है।
जवाहरबाग कांड उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब मथुरा के बीचोंबीच स्थित करीब 50 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी। लंबे समय तक चले विवाद और न्यायालय के आदेशों के बाद हुई कार्रवाई के दौरान तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और इंस्पेक्टर संतोष यादव समेत कई पुलिसकर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

अब स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश में अनुकूल परिस्थितियां हैं। मथुरा का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और सरकार के शीर्ष स्तर पर बैठे जिम्मेदार लोग यदि पहल करें तो शहीदों की याद में एक भव्य स्मारक और आधुनिक सिटी पार्क विकसित किया जा सकता है। उनका मानना है कि ऐसा परिसर न केवल शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान की प्रेरणा भी देगा।
मांग उठाने वालों का कहना है कि जवाहरबाग कांड में शहीद हुए पुलिस अधिकारियों और जवानों के साहस को इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। ऐसे में उनके सम्मान में एक स्थायी स्मारक का निर्माण मथुरा की जनता और प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और समाज के सभी वर्गों से इस मांग को समर्थन देने की अपील की है, ताकि शहीदों के सम्मान में जल्द कोई ठोस कदम उठाया जा सके।
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