ग्राम पंचायत ख्वाजगीपुर में पेयजल चबूतरा निर्माण पर उठे सवाल, कागजों में खर्च, ज़मीन पर नहीं दिखा काम

Tuesday, March 24, 2026 - 14:27
Updated: 4 months ago
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ग्राम पंचायत ख्वाजगीपुर में पेयजल चबूतरा निर्माण पर उठे सवाल, कागजों में खर्च, ज़मीन पर नहीं दिखा काम

शाहाबाद हरदोई। विकास खंड भरखनी की ग्राम पंचायत ख्वाजगीपुर में “सामुदायिक पेयजल स्थल पर प्लेटफॉर्म निर्माण” के नाम पर किए गए खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी अभिलेखों में लाखों रुपये के व्यय का उल्लेख है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर पेश कर रही है। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत में कहीं भी ऐसा कोई चबूतरा नजर नहीं आता, जिसके नाम पर धनराशि निकाली गई हो।दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इस कार्य की अनुमानित लागत ₹3,20,000 निर्धारित की गई थी, जबकि अब तक ₹3,13,760 खर्च दर्शाया गया है। 22 जनवरी 2025 को जारी वाउचर के माध्यम से चबूतरे की सामग्री एवं मजदूरी के नाम पर विभिन्न व्यक्तियों और एक ईंट भट्ठे को भुगतान किया गया। इन भुगतान आदेशों पर पंचायत सचिव नीरज कुमार वर्मा और सरपंच मधु के हस्ताक्षर दर्ज बताए गए हैं।आरोप यह भी सामने आया है कि इस निर्माण कार्य में पंचायत सदस्यों को भी मटेरियल और मिस्त्री के रूप में भुगतान किया गया। अभिलेखों में पंचायत सदस्य के नाम से सामग्री उपलब्ध कराने तथा मजदूरी/मिस्त्री मद में धनराशि जारी होने का उल्लेख है, जिसे पंचायत वित्तीय नियमों के विपरीत माना जा रहा है। नियमों के अनुसार पंचायत सदस्य कार्य की निगरानी में भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें सीधे तौर पर ठेकेदार, सप्लायर या श्रमिक के रूप में भुगतान किया जाना पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।जब इस निर्माण कार्य के बारे में जानकारी ली गई तो पंचायत सचिव नीरज कुमार वर्मा ने बताया कि हरदेव बाबा स्थान पर चबूतरा बनाया गया है। वहीं प्रधान प्रतिनिधि अबनीश त्रिवेदी ने पहले ऐसे किसी निर्माण से इनकार किया, लेकिन बाद में उसी स्थान को पेयजल चबूतरा बताने लगे। दोनों पक्षों के बयान में यह विरोधाभास पूरे मामले को और संदिग्ध बना देता है।उधर, गाँव के लोगों की राय इस दावे से मेल नहीं खाती। ग्रामीण लाला राम, पप्पू पुत्र जगन्नाथ तथा छैलविहारी सहित अन्य निवासियों ने बताया कि ग्राम पंचायत में कहीं भी पेयजल चबूतरा का निर्माण नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यदि कार्य कराया गया है तो संबंधित स्थल को सार्वजनिक किया जाए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।इस संदर्भ मे खंड विकास अधिकारी भरखनी अशोक कुमार दुबे से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायत मिलने पर जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।कागजों में दर्ज खर्च और जमीनी हकीकत के बीच दिख रहा अंतर पंचायत स्तर पर पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। साथ ही पंचायत सदस्यों को मटेरियल व मिस्त्री मद में भुगतान की बात सामने आने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विकास कार्य वास्तव में हुआ या सिर्फ अभिलेखों तक सीमित रह गया।

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