16 साल पुराने बिजली बिल पर उपभोक्ता आयोग सख्त: MPEB को नोटिस, बिल निरस्त करने और क्षतिपूर्ति की मांग
गुना(आरएनआई)हरिशंकर शर्मा बनाम मध्य प्रदेश विद्युत मंडल मामले में उपभोक्ता आयोग में महत्वपूर्ण सुनवाई
आज दिनांक 20 मई 2026 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, गुना के समक्ष आवेदक श्री हरिशंकर शर्मा (आयु 70 वर्ष), निवासी वॉर्ड नंबर 06, कुंभराज, जिला गुना द्वारा मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (अनावेदक) के विरुद्ध दायर परिवाद क्रमांक-94/2024 पर सुनवाई हुई।
आवेदक की ओर से अधिवक्ता डॉ. पुष्पराग शर्मा ने आयोग के समक्ष विस्तृत दलीलें पेश कीं। उन्होंने आयोग को अवगत कराया कि आवेदक ने वर्ष 2010 में विद्युत कनेक्शन प्राप्त किया था और लंबे समय तक नियमित रूप से बिलों का भुगतान किया। इसके बावजूद वर्ष 2022 में अचानक विद्युत कंपनी द्वारा 92,907 रुपये का भारी-भरकम बिल जारी कर दिया गया, जो पुराने बकाया को लेकर गलत तरीके से तैयार किया गया था।
आवेदक ने आयोग को बताया कि उन्होंने पहले ही 40,000 रुपये जमा कर दिए थे, फिर भी विभाग द्वारा बार-बार परेशान किया जा रहा है। आवेदक का आरोप है कि 12 वर्ष पुराने मामले को लेकर अचानक इतनी बड़ी राशि मांगना अवैध है। उन्होंने 10,000 रुपये एडवोकेट फीस, 5,000 रुपये अन्य खर्च तथा सेवा में कमी के कारण कुल 55,000 रुपये के नुकसान की भरपाई की मांग की है।
अधिवक्ता डॉ. पुष्पराग शर्मा ने जोर देकर कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि विद्युत विभाग की बिलिंग प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और उपभोक्ता अधिकारों के हनन का मामला है। उन्होंने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 56(2) का हवाला देते हुए कहा कि इतने लंबे समय बाद बिल जारी करना कानून के विरुद्ध है।
आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विपक्षी पक्ष (मध्य प्रदेश विद्युत मंडल) को नोटिस जारी किया और विस्तृत लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। आयोग ने मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रश्नों पर विपक्षी से स्पष्टीकरण मांगा है:
क्या 12 वर्ष पुराने कनेक्शन पर अचानक 92,907 रुपये का बिल जारी करना उचित है?
क्या इस प्रक्रिया में उपभोक्ता के साथ सेवा में कमी हुई है?
क्या आवेदक को राहत दी जानी चाहिए?
यह मामला गुना जिले के उन सैकड़ों उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो अचानक भारी बिजली बिलों से परेशान हैं। उपभोक्ता आयोग द्वारा इस मामले में उचित फैसला आने की उम्मीद है, जिससे बिजली विभाग की जवाबदेही तय हो सकेगी।
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