‘सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना की अनुमति’, धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का संतुलित निर्देश

धार भोजशाला को लेकर लंबे समय से चले आ रहे हिंदू और मुस्लिम पक्षों के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम और संतुलित निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना करने की अनुमति दी है, जबकि मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।

Thursday, January 22, 2026 - 13:23
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‘सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना की अनुमति’, धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का संतुलित निर्देश

नई दिल्ली (आरएनआई) सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने दोनों समुदायों से आपसी सम्मान और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। अदालत ने राज्य और जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था हर हाल में बनी रहनी चाहिए और किसी भी अप्रिय स्थिति से सख्ती से निपटा जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या जिला प्रशासन को पहले ही उपलब्ध कराई जाए, ताकि सुरक्षा और व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें। इसके लिए प्रशासन पास जारी करने या किसी अन्य उपयुक्त व्यवस्था को लागू कर सकता है। अदालत ने निर्देश दिया कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए परिसर के भीतर एक विशेष और अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए, जिसमें आने-जाने के लिए अलग रास्ता हो। इसी तरह हिंदू पक्ष को भी परिसर में अलग स्थान दिया जाएगा, ताकि वे बसंत पंचमी पर अपने पारंपरिक अनुष्ठान और पूजा कर सकें।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 11 मार्च 2024 के आदेश के तहत एएसआई द्वारा कराया गया वैज्ञानिक सर्वे केवल स्थल की ऐतिहासिक पहचान और वास्तविक स्वरूप जानने के उद्देश्य से किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह निर्देश दिया था कि सर्वे के नतीजों के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और न ही ऐसी खुदाई की जाएगी जिससे स्थल का स्वरूप बदले।

अदालत को बताया गया कि हाई कोर्ट के निर्देशानुसार वैज्ञानिक सर्वे पूरा हो चुका है और उसकी रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट के समक्ष रखी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका पर वरिष्ठ न्यायाधीशों की डिवीजन बेंच द्वारा, संभव हो तो दो सप्ताह के भीतर सुनवाई की जाए। रिपोर्ट को खुली अदालत में खोला जाए और दोनों पक्षों को उसकी प्रति दी जाए, ताकि वे अपनी आपत्तियां, सुझाव या सिफारिशें दाखिल कर सकें।

दरअसल, यह विवाद तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब हिंदू पक्ष ने बसंत पंचमी के पूरे दिन अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति की मांग की। इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण जुमे की नमाज को लेकर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताई थी। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है, जिससे दोनों समुदायों को समान अवसर मिल सके और शांति व कानून-व्यवस्था बनी रहे।

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