लोक समाज में आज भी जीवंत है पर्यावरण संरक्षण की सनातन परंपरा: कपाली बाबा
कादीपुर (सुलतानपुर) । पर्यावरण संरक्षण की सनातन परम्परा आज भी लोक समाज में जीवंत है। इस सनातन परम्परा को संजोकर सुरक्षित रखना हम सबका दायित्व है।
यह बातें अघोरपीठ बाबा सत्यनाथ मठ के पीठाधीश्वर कपाली बाबा ने कहीं। वह गुरु पूर्णिमा पर्व के समापन पर मठ और अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी को बतौर संरक्षक सम्बोधित कर रहे थे।

सनातन परम्परा में पर्यावरण संरक्षण विषयक इस संगोष्ठी की अध्यक्षता संत तुलसीदास पीजी कालेज के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु व संचालन वरिष्ठ साहित्यकार मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने किया।
स्वागत व भूमिका प्रस्तुत करते हुए सत्यनाथ विद्वत परिषद के सचिव श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि अघोरपीठ अपनी सनातन परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करती है ।
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ सलिल श्रीवास्तव ने कहा पेड़ उर्जा के स्रोत हैं। वातावरण का तापमान कम करने और मनुष्य को स्वस्थ रखने के लिए वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है।
उत्तर प्रदेश पिछड़ावर्ग आयोग के सदस्य घनश्याम चौहान ने कहा कि सनातन परम्परा के पर्यावरण संरक्षण के काम को वर्तमान सरकार आगे बढ़ा रही है।
राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने बताया कि अघोर परम्परा प्रकृति को केवल संसाधन के रूप में नहीं बल्कि जीवंत और पवित्र पारिवारिक इकाई के रूप में देखती है। पर्यावरण संरक्षण कानून से नहीं संस्कार से होगा और संस्कार सनातन परम्पराओं के पालन करने से ही आयेगा।

संत तुलसीदास पीजी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ करुणेश भट्ट ने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में पर्यावरण संरक्षण पर पर्याप्त सामग्री है। हमें इसे पढ़ना चाहिए। संगोष्ठी को युवा साहित्यकार पवन कुमार सिंह, एडवोकेट बृजेश मिश्र,ध्यानचंद सिंह, डॉ.राम प्यारे प्रजापति व आर एन शर्मा आदि ने सम्बोधित किया।
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