दुबई क्यों बना निशाना? 137 मिसाइलें और 209 ड्रोन के हमले के बीच बुर्ज खलीफा तक पहुंचा खतरा, यूएई ने कैसे टाली बड़ी तबाही
दुबई (आरएनआई)। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी ठिकानों पर संयुक्त हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर 137 मिसाइलें और 209 ड्रोन दागे, जिनका मुख्य निशाना अबू धाबी के पास स्थित अल-धफरा एयर बेस बताया गया। हालांकि यूएई की उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों ने अधिकांश हमलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया, लेकिन गिरते मलबे ने दुबई के कई प्रतिष्ठित स्थलों को प्रभावित किया। हालात की गंभीरता को देखते हुए दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सभी उड़ानें अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दी गईं।
हमले के दौरान दुबई के प्रतीक माने जाने वाले बुर्ज खलीफा के आसपास जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। 828 मीटर ऊंची यह इमारत दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है और दुबई की पहचान बन चुकी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक ड्रोन को इसके आसपास मंडराते देखा गया और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में इमारत के निकट धुआं उठता दिखाई दिया। एहतियातन इमारत को खाली करा लिया गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि बुर्ज खलीफा सीधे निशाने पर था या उसे कोई संरचनात्मक नुकसान हुआ। इसकी अनुमानित लागत करीब 1.5 अरब डॉलर बताई जाती है और इसका व्यापक बीमा कवर भी है।
इसी तरह प्रतिष्ठित सात सितारा होटल बुर्ज अल अरब के बाहरी हिस्से में भी गिरते मलबे से आग लगने की खबर सामने आई। दुबई मीडिया कार्यालय ने इसे मामूली आग बताया जिसे शीघ्र काबू में कर लिया गया। पाम जुमेराह क्षेत्र में स्थित एक होटल परिसर के बाहर भी धुआं और लपटें देखी गईं, जहां चार लोग घायल हुए। कुछ घंटों बाद उसी इलाके में एक और विस्फोट की सूचना मिली। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इमारतों के पास ड्रोन गतिविधि दिखाई दी।
रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जेबल अली बंदरगाह में भी आग लगने की सूचना मिली। यह यूएई का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है और पश्चिमी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना माना जाता है। यहां से अमेरिकी युद्धपोतों और अन्य नौसैनिक जहाजों की आवाजाही नियमित रूप से होती है, जिससे इसका सामरिक महत्व और बढ़ जाता है।
इतने बड़े हमले के बावजूद यूएई ने व्यापक तबाही को टालने में सफलता हासिल की। इसके पीछे उसकी बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली को प्रमुख कारण माना जा रहा है। यूएई के पास अमेरिकी प्रणाली THAAD तैनात है, जो ऊंचाई पर बैलिस्टिक मिसाइलों को उनकी अंतिम उड़ान चरण में सीधी टक्कर मारकर नष्ट करती है। वर्ष 2022 में यूएई अमेरिका के बाहर THAAD तैनात करने वाला पहला देश बना था। इसके साथ ही MIM-104 पैट्रियट प्रणाली कम ऊंचाई पर आने वाले खतरों को रोकने में सक्षम है। इन दोनों प्रणालियों के संयोजन ने अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार बैलिस्टिक मिसाइलें 20,000 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से उड़ान भर सकती हैं। इतनी तेज गति के कारण रक्षा प्रणाली को कुछ ही मिनटों में लक्ष्य का पता लगाकर उसकी दिशा और वेग का सटीक अनुमान लगाना होता है। जरा सी चूक बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
हालांकि यूएई ने बड़े पैमाने पर हमलों को विफल कर दिया, फिर भी गिरते मलबे से दुबई के पांच प्रमुख स्थान प्रभावित हुए और कुल आठ लोग घायल हुए। क्षेत्र में तनाव अब भी बरकरार है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
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