जनसंसद में ट्रांसजेंडर समुदाय की आवाज, प्रस्तावित संशोधन बिल पर उठे गंभीर सवाल
जनसंसद के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। प्रतिनिधियों ने बताया कि वे लंबे समय से संस्थागत भेदभाव और नीतिगत उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, जिससे उनका सामाजिक और संवैधानिक अस्तित्व प्रभावित हो रहा है।
इस दौरान भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा प्रस्तावित Transgender Persons Amendment Bill को लेकर गहरी चिंता जताई गई। समुदाय का कहना है कि यह बिल उनके संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर सीधा आघात करता है। उनका मानना है कि यह कानून सुरक्षा देने के बजाय उन्हें और अधिक हाशिए पर धकेलता है।
प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि बिल ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के self-identification के अधिकार को कमजोर करता है, जो उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के विपरीत है। साथ ही, इसमें मेडिकल बोर्ड के समक्ष अनिवार्य जांच की प्रक्रिया को अपमानजनक बताते हुए इसे व्यक्तिगत गरिमा के खिलाफ बताया गया।
इसके अलावा, यह भी कहा गया कि यह प्रस्तावित कानून देश की विविध सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचा सकता है और बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के दंडात्मक प्रावधानों को बढ़ावा देता है। सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर जताई गई कि इस महत्वपूर्ण विधेयक को लाने से पहले ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ पर्याप्त संवाद नहीं किया गया।
इस मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन, स्वतंत्रता, पहचान और गरिमा का अधिकार देता है, और किसी भी कानून को इन मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।
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