गर्भवती प्रियंका हत्याकांड: 24 घंटे बाद खत्म हुआ धरना, परिवार को ₹21 लाख मुआवजा; फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस
सीकर जिले के सरवड़ी गांव में गर्भवती प्रियंका कंवर हत्याकांड को लेकर न्याय की मांग में चल रहा धरना प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच सहमति बनने के बाद करीब 24 घंटे बाद समाप्त हो गया। समझौते के तहत पीड़ित परिवार को 21 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने, विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) नियुक्त करने और निष्पक्ष व त्वरित जांच का आश्वासन दिया गया है।
यह मामला 27 जुलाई का है, जब सरवड़ी गांव में एक पड़ोसी युवक ने कथित तौर पर घर में घुसकर गर्भवती प्रियंका कंवर पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में प्रियंका गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण गर्भ में पल रहे छह माह के शिशु की पहले ही मौत हो गई, जबकि चार दिन तक उपचार के बाद प्रियंका ने भी दम तोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
प्रियंका की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने धोद थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया था। कई दौर की वार्ता के बाद प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच समझौता हुआ। इसके तहत डीएसपी और एएसपी की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने, दोषी को जल्द सजा दिलाने और पात्रता के अनुसार पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी सहमति बनी।
मामले में सीकर बार के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की एक टीम ने पीड़ित परिवार की ओर से निशुल्क कानूनी पैरवी करने का निर्णय लिया है। वहीं, धोद की सरस्वती स्कूल के निदेशक शिवराज सिंह ने प्रियंका के तीन वर्षीय बेटे की पहली से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई और हॉस्टल का पूरा खर्च वहन करने की घोषणा की है। इसके अलावा जनसहयोग से जुटाई गई आर्थिक सहायता को बच्चे के नाम सावधि जमा (एफडी) कराने का भी प्रयास किया जाएगा।
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