कानपुर किडनी कांड: 9.5 लाख में खरीदकर 90 लाख में बेचते थे अंग, डॉक्टर दंपती समेत 10 हिरासत में; 50 से अधिक अस्पताल जांच के घेरे में
कानपुर (आरएनआई): कानपुर में उजागर हुए किडनी रैकेट ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हिला कर रख दिया है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गरीब और जरूरतमंद लोगों से करीब 9.5 लाख रुपये में किडनी खरीदकर उसे 90 लाख रुपये तक में बेचा जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने एक डॉक्टर दंपती सहित 10 लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि 50 से अधिक अस्पताल जांच के दायरे में आ गए हैं।
जांच के दौरान एक अवैध अस्पताल और एक बंद पड़े अस्पताल में किडनी डोनर मिलने से सनसनी फैल गई। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन तीन निजी अस्पतालों के नाम सामने आए हैं, उनमें से एक के पास वैध पंजीकरण तक नहीं था और वह पूरी तरह अवैध रूप से संचालित हो रहा था। मामले के खुलासे के बाद ही स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने छापेमारी और निरीक्षण शुरू किया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस रैकेट में बड़े डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आशंका है कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ, दिल्ली और मुंबई से सर्जन बुलाए जाते थे। ट्रांसप्लांट टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट, सर्जन, यूरोलॉजिस्ट, एनेस्थेसिस्ट और अन्य विशेषज्ञ शामिल रहते थे, जबकि जिन अस्पतालों में यह ऑपरेशन किए जा रहे थे, वहां बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज के बहाने फंसाकर उनकी किडनी की जांच की जाती थी और जरूरतमंद मरीजों से मैच होने पर अवैध तरीके से ट्रांसप्लांट कर दिया जाता था। यह भी पता चला है कि करीब 22 साल पहले भी शहर में इस तरह का मामला सामने आया था, जिसमें शामिल कुछ लोग आज भी चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय हैं।
मामले में पांडुनगर निवासी डॉ. इंदरजीत सिंह, उनके भाई सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा समेत अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, पुलिस को आवास विकास स्थित एक बंद अस्पताल में भर्ती किडनी डोनर भी मिला है, जिसे अब सुरक्षा के बीच सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
किडनी रैकेट के भंडाफोड़ के बाद शहर के निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। छापेमारी के डर से कई अस्पतालों ने रातोंरात अपनी लाइटें बंद कर दीं और गतिविधियां सीमित कर दीं, जिससे संदेह और गहरा गया है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार जांच में जुटी हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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