कछौना में अवैध खनन से सड़कों की हालत खराब, ग्रामीणों में आक्रोश
कछौना, हरदोई (आरएनआई) कछौना क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी तंत्र की ढिलाई और कथित विभागीय सांठगांठ के चलते खनन माफिया पर्यावरण संबंधी नियमों, खासकर एनजीटी के निर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रशासन की ओर से पूर्व में की गई छिटपुट कार्रवाई के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि रैंसो, बघुआमऊ, सैदूपुर, इनायतपुर, कटियामऊ, लोन्हारा, बेरुआ, पतसेनी देहात, समसपुर, टिकारी सहित दर्जनों गांवों में अवैध खुदाई और ओवरलोड वाहनों का संचालन बदस्तूर जारी है।
क्षेत्र में बढ़ते आक्रोश के बाद पूर्व में उपजिलाधिकारी संडीला ने कटियामऊ जैसे गांवों में दबिश देकर जेसीबी और डंपरों को सीज किया था। उस समय की कार्रवाई से उम्मीद जगी थी कि खनन माफियाओं पर शिकंजा कसेगा, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से माफिया फिर सक्रिय हो गए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों, ईंट भट्ठों और निजी प्लॉटों की आड़ में जंगल, झाड़ियों और किसानों की मर्जी के बिना उनकी भूमि का स्वरूप बदला जा रहा है।
खनन माफियाओं के रसूख का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। रैंसो, बघुआमऊ, बरौली, इनायतपुर और कटियामऊ जैसे गांवों की सड़कें, जो कुछ समय पहले ही बनी थीं, अब गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बरौली-पटकुलियां जैसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों पर ओवरलोड डंपरों की आवाजाही से चलना दूभर हो गया है। सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढों के कारण स्कूली वाहनों और एम्बुलेंस का निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में इन गड्ढों में जलभराव के चलते बच्चों के डूबने जैसी हृदयविदारक घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन अब तक मौन बना हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस, राजस्व और खनन विभाग के बीच कथित ‘गठजोड़’ के कारण ही यह अवैध धंधा फल-फूल रहा है। एक तरफ लोक निर्माण विभाग सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, तो दूसरी तरफ खनन माफिया चंद दिनों में ही सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
पूरे कछौना क्षेत्र के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से शिकायत कर तत्काल प्रभाव से अवैध खनन रोकने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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