‘ऑपरेशन लोटस’ से सत्ता परिवर्तन तक: एमपी की सबसे चर्चित सियासी कहानी

Sunday, April 26, 2026 - 18:02
Updated: 3 months ago
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‘ऑपरेशन लोटस’ से सत्ता परिवर्तन तक: एमपी की सबसे चर्चित सियासी कहानी

2020 में कोरोना की आहट से पहले जब पूरा देश होली मना रहा था तब मध्यप्रदेश में अलग ही किस्म का गुलाल उड़ रहा था। ये गुलाल था 15 महीने की कमलनाथ सरकार की रवानगी का।

9 मार्च 2020 को होली के दिन लोग रंग-गुलाल करके जब अपने घर लौटे तो न्यूज चैनलों पर चल रही खबरों ने उन्हें फिर से बाहर नहीं जाने दिया।
खबर थी कि कांग्रेस के 22 विधायक गायब हैं। इन विधायकों में 6 मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसोदिया भी शामिल थे।

खबर मिली कि ये सभी बेंगलुरु के एक होटल में हैं। इसके अलावा विधायक हरदीप सिंह डंग, जसपाल सिंह जज्जी, राजवर्धन सिंह, ओपीएस भदौरिया, मुन्नालाल गोयल, रघुराज सिंह कंसाना, कमलेश जाटव, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, गिर्राज दंडोतिया, रक्षा संतराम सिरौनिया, रणवीर जाटव, जसवंत जाटव, मनोज चौधरी, बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना शामिल थे। लेकिन ये तो पार्ट 2 था।

इस अजीबोगरीब होली की पटकथा हफ्ते भर पहले लिख दी गई थी जब दिल्ली में ऑपरेशन लोटस का पार्ट 1 शुरू हुआ था।
2-3 मार्च की दरमियानी रात थी। इस दिन कमलनाथ सरकार गिराने का ट्रेलर रिलीज हुआ। जगह थी गुरुग्राम से सटी मानेसर स्थित आईटीसी ग्रैंड भारत होटल। MP के नंबर प्लेट वाली कई गाड़ियां उस रात यहां एक के बाद एक पहुंचने लगती हैं। 

सपा विधायक राजेश शुक्ला (बबलू), बसपा के संजीव सिंह कुशवाह, कांग्रेस के ऐंदल सिंह कंसाना, रणवीर जाटव, कमलेश जाटव, रघुराज कंसाना, हरदीप सिंह, बिसाहूलाल सिंह और निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा। भाजपा के अरविंद भदौरिया, नरोत्तम मिश्रा और रामपाल सिंह पहले से होटल में मौजूद थे।

इधर, बसपा से निष्कासित विधायक राम बाई को लेकर भूपेंद्र सिंह BJP नेता के चार्टर्ड प्लेन से भोपाल से दिल्ली पहुंचते हैं।
लेकिन इस मूवमेंट की जानकारी लीक हो गई यह जानकारी कांग्रेस तक भी पहुंच जाती है। इसके बाद तो दिग्विजय सिंह से लेकर कमलनाथ और जीतू पटवारी से लेकर जयवर्धन सिंह तक सुपर एक्टिव हो जाते हैं।
कांग्रेस नेता समझा बुझाकर विधायक रामबाई और तीन कांग्रेस विधायक ऐंदल सिंह कंसाना, रणवीर जाटव, कमलेश जाटव को लेकर लौटने में कामयाब हो जाते हैं। रघुराज कंसाना, हरदीप सिंह, बिसाहूलाल सिंह, राजेश शुक्ला, संजीव सिंह कुशवाह और सुरेंद्र सिंह 4 मार्च को दोपहर बाद होटल से निकलते हैं, लेकिन भोपाल नहीं पहुंचते। भाजपाई इन्हें बेंगलुरु लेकर पहुंचे।

यहां कर्नाटक में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र को इन विधायकों को संभालने का जिम्मा सौंपा गया। इन्हें बेंगलुरु के प्रेस्टीज पालम मेडोज में रखा गया।
बीजेपी हाईकमान ने ऑपरेशन लोटस में शर्त रखी थी कि किसी भी सूरत में यह फेल नहीं होना चाहिए, लेकिन कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद यह कमजोर हो गया। 5 मार्च को नरोत्तम समेत दूसरे नेता दिल्ली से भोपाल के लिए रवाना हो गए, लेकिन शिवराज सिंह चौहान को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने दिल्ली बुला लिया।

इधर, बेंगलुरु से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से फोन पर बात की और उन्हें भरोसा दिलाया था कि हम सब आपके साथ हैं। इन विधायकों की 4-5 मार्च को बीजेपी के बड़े नेताओं से मीटिंग होनी थी।
लेकिन 6 मार्च को अचानक हरदीप सिंह डंग ने इस्तीफा दे दिया।

डंग के इस्तीफे के बाद कमलनाथ एक्टिव हुए। कांग्रेस के सभी विधायकों को भोपाल बुलाया गया और सभी को राजधानी नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए। अभी तक सिंधिया की एंट्री नहीं हुई थी। इधर भाजपा का हाईकमान भी अब ऑपरेशन लोटस को अपने हाथ में ले चुका था।

ऑपरेशन अब पूरी तरह सिंधिया पर शिफ्ट हुआ और होली के दिन सिंधिया खेमे के विधायकों के गायब होने की खबर आई। सिंधिया इस समय दिल्ली में थे।
नाराज सिंधिया को मनाने के लिए कांग्रेस ने उनके दोस्तों का सहारा लिया। मिलिंद देवड़ा और सचिन पायलट को इसकी जिम्मेदारी दी। लेकिन, सिंधिया किसी से नहीं मिले। सिंधिया की नाराजगी पर BJP पूरी तरह एक्टिव थी। दिल्ली से ही बेंगलुरु में बैठे अरविंद भदौरिया से भी बात की।

9 मार्च को ही देर रात खबर आई कि ज्योतिरादित्य सिंधिया गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने पहुंचे हैं। इस खबर के बाद यह साफ हो गया कि कमलनाथ सरकार खतरे में है।
10 मार्च को कांग्रेस से इस्तीफा दिया, PM मोदी से मिले
अगले दिन 10 मार्च की सुबह सिंधिया अपने दिल्ली स्थित आवास से सीधे एक बार फिर गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की। मोदी और शाह से मुलाकात के कुछ ही देर बात ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजा। सिंधिया का इस्तीफा होते ही बेंगलुरु में मौजूद 22 विधायकों ने भी एक साथ अपने इस्तीफे दे दिए। कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई।

अहं की लड़ाई बनी कांग्रेस में घमासान की वजह
सिंधिया और कमलनाथ के बीच सियासी वर्चस्व की लड़ाई को कांग्रेस की सरकार गिरने की बड़ी वजह माना गया। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन रही थी। टीकमगढ़ की एक सभा में ज्योतिरादित्य के एक ऐलान ने इस असहमति को विवाद में बदल दिया था और फिर यही विवाद कमलनाथ सरकार गिरने की प्रमुख वजह माना गया।

टीकमगढ़ में अतिथि शिक्षकों ने सिंधिया से उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर सवाल किया था। इस पर सिंधिया ने कहा था- अगर अतिथि शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह उनके साथ सड़कों पर उतरेंगे। यह पहला मौका था जब सिंधिया ने अपनी ही सरकार के खिलाफ कोई बयान दिया था। इस बयान पर सियासी रस्साकशी उस समय और तेज हो गई, जब कमलनाथ ने कह दिया था- उतर जाएं सड़क पर। माना जा रहा है कि कमलनाथ की यही बात सिंधिया को चुभ गई थी।

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