आईआईटी खड़गपुर के छात्र को मेडिकल आधार पर IIT रुड़की ट्रांसफर की मंजूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित IIT खड़गपुर के एक छात्र को मेडिकल आधार पर IIT रुड़की में ट्रांसफर की अनुमति दे दी है। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए IIT खड़गपुर को एक सप्ताह के भीतर छात्र का ट्रांसफर/माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य आवश्यक दस्तावेज जारी करने का निर्देश दिया।
छात्र वर्तमान में IIT खड़गपुर में आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहा है। याचिका में उसने कहा था कि संस्थान द्वारा ट्रांसफर से इनकार किए जाने के कारण वह आवश्यक जीवनरक्षक चिकित्सा उपचार से वंचित हो रहा है। छात्र ने यह भी दावा किया कि IIT खड़गपुर पहले भी मेडिकल आधार पर अन्य छात्रों को ट्रांसफर की अनुमति दे चुका है।
याचिका के अनुसार छात्र बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित है और उसे विशेष प्रकार की रिपीटिटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS) थेरेपी के साथ-साथ माता-पिता की निगरानी की आवश्यकता है। अदालत ने माना कि न्याय के हित में छात्र को IIT रुड़की में स्थानांतरण की सुविधा मिलनी चाहिए ताकि उसका उपचार प्रभावित न हो।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्र को IIT रुड़की में प्रवेश से संबंधित सभी नियमों, फीस संरचना और अन्य वित्तीय दायित्वों का पालन करना होगा।
वहीं, एक अन्य मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। उन्होंने स्पेशल लीव याचिका (SLP) दायर कर विदेश में उपचार के लिए अनुमति देने की मांग की है।
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