अवैध जमाबंदी पर जिलाधिकारी का बड़ा एक्शन : सीओ और राजस्व कर्मचारी पर गिरी गाज

Jan 13, 2026 - 23:03
Jan 13, 2026 - 23:08
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अवैध जमाबंदी पर जिलाधिकारी का बड़ा एक्शन : सीओ और राजस्व कर्मचारी पर गिरी गाज

मुजफ्फरपुर : बिहार के मुजफ्फरपुर में जिलाधिकारी का बड़ा एक्शन, नप गए सीओ और कई प्रखंडों के राजस्व कर्मचारी.

सबसे पहले मोतीपुर अंचल अंतर्गत बियाडा (बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण) की 16.86 एकड़ भूमि की अवैध जमाबंदी कर उसे निजी व्यक्तियों को स्थानांतरित किए जाने के गंभीर मामले में जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकारी भूमि के साथ की गई इस गंभीर अनियमितता को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्कालीन अंचलाधिकारी मोतीपुर रुचि कुमारी के निलंबन की अनुशंसा संबंधित विभाग से की है, जबकि राजस्व कर्मचारी नागेंद्र प्रसाद ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई संचालित करने का आदेश जारी किया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय अंचल कार्यालय औराई निर्धारित किया गया है.

जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकारी कार्य में अनियमितता, लापरवाही और भ्रष्ट आचरण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले अधिकारी एवं कर्मी के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं भूमि सुधार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है.

जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं...

मामला प्रकाश में आते ही जिलाधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इसकी जांच अपर समाहर्ता राजस्व प्रशांत कुमार से कराई. जांच प्रतिवेदन में गंभीर तथ्य सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 7 मई 2025 को ऑनलाइन परिमार्जन प्लस के माध्यम से एक निजी व्यक्ति के नाम से मौजा बरियारपुर के खाता एवं खेसरा से कुल 9.56 एकड़ भूमि की ऑनलाइन जमाबंदी सृजित की गई। यह जमाबंदी राजस्व कर्मचारी नागेंद्र प्रसाद ठाकुर, अंचल कार्यालय मोतीपुर द्वारा की गई अनुशंसा के आधार पर तत्कालीन अंचलाधिकारी मोतीपुर द्वारा ऑनलाइन स्वीकृत की गई.

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इस जमाबंदी के संबंध में अंचल कार्यालय में कोई ऑफलाइन अभिलेख, दस्तावेज या वैध कागजात उपलब्ध नहीं हैं। अर्थात बिना किसी ठोस आधार और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बियाडा को हस्तांतरित सरकारी भूमि को निजी व्यक्ति के पक्ष में ऑनलाइन जमाबंदी कर दी गई। जांच प्रतिवेदन ने इस पूरे कृत्य को पूर्णतः अवैधानिक, विभागीय नियमों एवं प्रावधानों के सर्वथा विपरीत और गंभीर कदाचार की श्रेणी में माना है.

उल्लेखनीय है कि मोतीपुर अंचल के मौजा बरियारपुर में कुल 61.33 एकड़ भूमि मोतीपुर शुगर फैक्ट्री के नाम से दर्ज थी, जिसे नियमानुसार बियाडा को हस्तांतरित किया गया। इसमें से 7.98 एकड़ भूमि का दाखिल-खारिज बियाडा के पक्ष में पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष 53.35 एकड़ भूमि के दाखिल-खारिज हेतु बियाडा द्वारा आवेदन किया गया था। इसी प्रक्रिया के दौरान 16.86 एकड़ भूमि की अवैध जमाबंदी निजी व्यक्तियों के नाम कर दी गई.

जांच में यह भी सामने आया कि एक व्यक्ति के नाम 9.56 एकड़ तथा इसी मौजा में दूसरे व्यक्ति के नाम 7.30 एकड़ भूमि की जमाबंदी कर दी गई है। यह दोनों ही जमाबंदियां ऑनलाइन परिमार्जन प्लस के माध्यम से की गईं, जबकि इनके पक्ष में कोई वैध दस्तावेज या पूर्व स्वीकृत प्रक्रिया मौजूद नहीं थी। जमीन से जुड़े जनहित के मामलों को संवेदनशील एवं गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने पूरी तत्परता से त्वरित एवं कठोर कार्रवाई की है। साथ ही ऐसे मामलों में संलिप्त अधिकारियों, कर्मियों एवं असामाजिक तत्वों को सावधान रहने की सख्त हिदायत दी है.

नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई...

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 1976 के नियम 3(1) के प्रावधानों के तहत नागेंद्र प्रसाद ठाकुर, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय मोतीपुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही, अंचलाधिकारी मोतीपुर को आदेश दिया गया है कि वे श्री नागेंद्र प्रसाद ठाकुर के विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ में आरोप गठित कर भूमि सुधार उप समाहर्ता, पश्चिमी, मुजफ्फरपुर के माध्यम से एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराएं, ताकि उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की जा सके.

इसी क्रम में तत्कालीन अंचलाधिकारी मोतीपुर रुचि कुमारी के विरुद्ध भी जिलाधिकारी ने निलंबन / विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है। इसके अतिरिक्त राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा भी उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है और इनके कृत्य को विभागीय निर्देशों के विपरीत तथा बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 3(1) का उल्लंघन माना गया है.

ऐसे मामलों पर जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में भी हुई है सख्त कार्रवाई...

यह पहला मामला नहीं है जब जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने राजस्व एवं भूमि सुधार से जुड़े मामलों में सख्ती दिखाई हो। इसके पूर्व कांटी अंचल में कृषि विभाग की भूमि का दाखिल-खारिज किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन अंचलाधिकारी कांटी के विरुद्ध भी आरोप पत्र प्रपत्र ‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी भूमि की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता एवं लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

गायघाट में भी राजस्व कर्मचारी हुए निलंबित...

इसी क्रम में गायघाट अंचल के राजस्व कर्मचारी अवधेश कुमार सिंह को भी कर्तव्यहीनता, लापरवाही एवं वरीय पदाधिकारी के आदेशों की अवहेलना के आरोप में जिलाधिकारी ने निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पारु अंचल निर्धारित किया गया है।

इस संबंध में अंचलाधिकारी गायघाट द्वारा जिला पदाधिकारी को प्रतिवेदन सौंपा गया था, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2024 में आई बाढ़ के दौरान अवधेश कुमार सिंह को अंचल कार्यालय गायघाट में योगदान देने के निर्देश दिए गए थे, बावजूद इसके वे कई दिनों तक अनुपस्थित रहे। इससे पंचायत संबंधी दैनिक कार्यों एवं आपदा प्रबंधन कार्यों में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई.

इसके अतिरिक्त, उनके द्वारा सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज हेतु की गई अनुशंसा के संबंध में जब उनसे पूर्व में स्वीकृत दाखिल-खारिज एवं जमाबंदी का ब्योरा मांगा गया, तो उन्होंने निर्देशों के बावजूद कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। उन्होंने यह तर्क दिया कि संबंधित जमाबंदी क्षतिग्रस्त है, जबकि जांच में यह पाया गया कि उक्त जमाबंदी कायम है. जांच में यह भी सामने आया कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान अवधेश कुमार सिंह को सेक्टर पदाधिकारी का दायित्व सौंपा गया था, लेकिन मतदान तिथि से एक दिन पूर्व वे बिना सूचना के अनुपस्थित हो गए और उनका मोबाइल फोन भी लगातार बंद रहा। अंतिम समय में बिना प्रशिक्षण प्राप्त राजस्व कर्मचारी हिमांशु कुमार को सेक्टर मजिस्ट्रेट का दायित्व सौंपना पड़ा, जिससे चुनावी कार्य प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न हुई.

इन सभी तथ्यों के आलोक में अंचलाधिकारी गायघाट द्वारा अवधेश कुमार सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र गठित कर निलंबन की अनुशंसा की गई थी, जिसे जिला पदाधिकारी ने स्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली, 1976 के नियम 3(1) के तहत उन्हें निलंबित कर दिया। साथ ही निर्देश दिया गया है कि साक्ष्यों के साथ प्रपत्र गठित कर भूमि सुधार उप समाहर्ता, मुजफ्फरपुर पूर्वी के माध्यम से एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जाए, ताकि विभागीय कार्रवाई प्रारंभ हो सके.

मुसहरी सीओ, आर ओ को आवंटित सरकारी आवास में रहने का आदेश, अन्यथा फरवरी के वेतन निकासी पर रोक ...

राजस्व एवं भूमि सुधार के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने मुसहरी अंचल में भी कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने मुसहरी के अंचलाधिकारी एवं राजस्व अधिकारी को दामुचक स्थित सरकारी आवास आवंटित करते हुए वहीं शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। इससे सरकारी कार्यों के निष्पादन में निरंतरता बनी रहेगी और आम जनता के भूमि से जुड़े मामलों का समयबद्ध, ईमानदार एवं पारदर्शी निपटारा सुनिश्चित किया जा सकेगा.

जिलाधिकारी द्वारा निरंतर निगरानी और साप्ताहिक समीक्षा..

उल्लेखनीय है कि जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, भूमि मापी, अभियान बसेरा जैसे जनहित के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नियमित साप्ताहिक समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। इसके साथ ही फील्ड विजिट और वरीय अधिकारियों द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से कार्यों में उल्लेखनीय सुधार लाया गया है.

जिलाधिकारी ने कहा कि जहां एक ओर प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अनियमितता और लापरवाही पाये जाने पर बिना किसी दबाव के कठोर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि की सुरक्षा और जनहित से जुड़े मामलों में प्रशासन किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा.

मोतीपुर, गायघाट और मुसहरी से जुड़े इन मामलों में की गई कार्रवाई ने जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों की अनदेखी, सरकारी भूमि के दुरुपयोग और कर्तव्यहीनता पर अब शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी। प्रशासनिक सख्ती से जहां एक ओर दोषियों में हड़कंप है, वहीं आम जनता में यह विश्वास भी मजबूत हुआ है कि उनकी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट...!

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