‘सरकार-ए-खालसा’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, इतिहास से वर्तमान को दिशा देने पर जोर
बहादुरगढ़/पटियाला (आरएनआई) शिक्षा निदेशालय, बहादुरगढ़, पटियाला के प्रबंधन के तहत शिक्षा सचिव के मार्गदर्शन में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में शिक्षा निदेशालय, बहादुरगढ़, पटियाला में ‘सरकार एकालाप: एक पुनर्विचार’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।इस सेमिनार में अलग-अलग यूनिवर्सिटी के स्कॉलर्स, रिसर्चर्स, प्रोफेसर्स और अलग-अलग कॉलेजों के स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया और करीब 90 पेपर्स पढ़े गए। सेमिनार की शुरुआत खालसा कॉलेज, पटियाला के स्टूडेंट्स की ओपनिंग स्पीच से हुई। डॉ. राजिंदर कौर, प्रिंसिपल, गुरु गोबिंद सिंह खालसा कॉलेज फॉर विमेन, झाड़ साहिब, लुधियाना ने वेलकम एड्रेस दिया और स्टेज मॉडरेट भी किया। इस बीच, प्रो. सुलखन सिंह, रिटायर्ड, हिस्ट्री डिपार्टमेंट, श्री गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने अपने कीनोट एड्रेस में कहा कि इस सेमिनार का सब्जेक्ट सिर्फ हिस्टोरिकल स्टडीज़ तक ही लिमिटेड नहीं है, बल्कि यह हमारे सोशल, पॉलिटिकल और मोरल वैल्यूज़ से भी जुड़ा है। सरकार-ए-खालसा का कॉन्सेप्ट हमें सिख इतिहास के सुनहरे दौर में ले जाता है, जहाँ न्याय, बराबरी और सेवा के बुनियादी उसूलों पर आधारित सरकार बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह की पूरी पर्सनैलिटी को समझने के लिए पढ़ने वालों, सुनने वालों और हर इंसान को जानकारी होना ज़रूरी है, जिसमें यह सेमिनार अपना खास योगदान देगा। इस सेमिनार में महाराजा रणजीत सिंह के समय की सरकार, उसूलों और धर्म वगैरह के पहलुओं पर भी बात की गई।
इस मौके पर SGPC के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सरकार-ए-खालसा सिर्फ़ एक पॉलिटिकल सिस्टम नहीं था, बल्कि न्याय, बराबरी और धार्मिक आज़ादी पर आधारित एक अनोखा सिस्टम था। उन्होंने कहा कि आज के सेमिनार का मकसद सिर्फ़ इतिहास को याद करना ही नहीं, बल्कि उससे गाइडेंस लेना भी है। एडवोकेट धामी ने कहा कि गुरु साहिब से हमें जो गुरु के उसूलों का आशीर्वाद और शान मिली है, उसे संभालकर रखना इंसान की धार्मिक और नैतिक ज़िम्मेदारी है। उद्घाटन समारोह के आखिर में शिक्षा सचिव सुखमिंदर सिंह ने मौजूद गणमान्य लोगों का धन्यवाद किया और डॉ. परमजीत कौर, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, श्री आनंदपुर साहिब और डॉ. दविंदर सिंह, खालसा कॉलेज, पटियाला ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई। सेमिनार के खास भाषण में प्रो. मोहम्मद इदरीस, प्रो. इतिहास विभाग और इंचार्ज शहीद उधम सिंह चेयर, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला ने कहा कि सरकार-ए-खालसा की नींव सच्चाई, न्याय, निडरता और सेवा के सिद्धांतों पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह का यह सिस्टम किसी एक वर्ग या धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे लोगों के लिए था, जिसमें राज का मतलब राज नहीं, बल्कि सेवा था। सत्ता का मतलब दबदबा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी था। महाराजा का राज कोई आम राज नहीं, बल्कि सेक्युलरिज्म और बराबरी का राज था। इस मौके पर चार टेक्निकल सेशन रखे गए, जिनमें डॉ. जसबीर सिंह, डॉ. संदीप कौर, डॉ. जगजीवन सिंह ने चेयरपर्सन के तौर पर हिस्सा लिया। डॉ. बलजीत सिंह विर्क, डॉ. परनीत कौर ढिल्लों और डॉ. राकेश बावा ने स्पेशल स्पीकर के तौर पर खास भूमिका निभाई।
इस मौके पर पूर्व प्रेसिडेंट प्रो. किरपाल सिंह बडूंगर, अंतरिम कमेटी मेंबर जत्थेदार सुरजीत सिंह गढ़ी, जत्थेदार गुरमीत सिंह बूह, मेंबर, इंचार्ज एजुकेशन (स्कूल), स. रघबीर सिंह सहारनमाजरा, मेंबर, जत्थेदार जसमेर सिंह लच्छर वगैरह भी मौजूद थे।
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