राधा फाउंडेशन की ओर से हुआ सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर भव्य समारोह

अमेठी के मदर गीता इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित हुआ कार्यक्रम

Tuesday, March 10, 2026 - 17:38
Updated: 5 months ago
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राधा फाउंडेशन की ओर से हुआ सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर भव्य समारोह

अमेठी (आरएनआई) महान समाज सुधारक और महिला शिक्षा की अग्रदूत सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर राधा फाउंडेशन अमेठी ने एक भव्य समारोह का आयोजन किया। यह कार्यक्रम बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के प्रायोजन से हुआ। मदर गीता इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित इस समारोह में क्षेत्र के कई विद्यालयों के लिए छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और शैक्षिक प्रतियोगिताओं के माध्यम से सावित्रीबाई फुले के जीवन और विचारों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत अंशिका, एंजल और मन्नत द्वारा प्रस्तुत स्वागत नृत्य से हुई। शाम्भवी, सिमिका, आयुषी, मानसी, शीतल, आराधना और श्रेया ने रोल प्ले के जरिए सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्ष को दर्शाया। उन्होंने शिक्षा के प्रति उनके महत्वपूर्ण योगदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रेरणा, शुभ, प्रांजल, सौम्या, आरोही और उनके समूह ने "एकता और विविधता" सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। श्रुति और हिमानी ने अपने मैशअप नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया। मरियम, वैष्णवी और अदिति ने महाभारत अभिनय प्रस्तुत किया, जिसके पहले दृश्य में कौशल ने अभिनय किया। लखनऊ से आए लोक कलाकारों ने भी सावित्रीबाई फुले के जीवन दर्शन पर आधारित मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने कार्यक्रम से यह संदेश दिया कि महिलाएं अवसर और शिक्षा प्राप्त कर देश व समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

मुख्य अतिथि बृजेश सिंह ने सावित्रीबाई फुले को एक प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस समय में महिलाओं को शिक्षा के अधिकार दिलाने के लिए अथक प्रयास किए, जब समाज में महिलाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उनके संघर्षों ने ही आज की भारतीय महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोले हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. त्रिवेणी सिंह, पूर्व प्राचार्य, आरआरपीजी कॉलेज उनके शैक्षिक दर्शन पर बात करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले का मानना था कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर किया जा सकता है और महिलाओं को सशक्त बनाया जा सकता है। बताया कि सावित्रीबाई फुले (1831-1897) भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् और कवियत्री थीं, जिन्होंने 19वीं सदी में महिलाओं और वंचितों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए पहला विद्यालय खोला और शिक्षा, छुआछूत मिटाने, बाल विवाह रोकने व विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। दिव्यं ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के प्रबंधक, डॉ. देव मणि तिवारी, ने उनके सामाजिक सुधारों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में काम किया, बल्कि उन्होंने बाल विवाह, सती प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी आवाज उठाई। अमेठी शाखा के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, चंद्रप्रकाश, ने सावित्रीबाई फुले के साहित्य और कविताओं के माध्यम से समाज को प्रेरित करने के तरीके पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं और हमें सामाजिक चेतना जगाने का कार्य करती हैं।राधा फाउंडेशन की अध्यक्ष, अरविंद श्रीवास्तव, ने सावित्रीबाई ने 1852 में 'महिला सेवा मंडल' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य महिलाओं को उनके मानवाधिकारों और सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूक करना था। उन्होंने "सत्यशोधक समाज" (1873) के माध्यम से जातिगत भेदभाव को चुनौती दी। वे एक कवियत्री थीं और उन्होंने 'काव्य फुले' और 'बावनकशी सुबोध रत्नाकर' जैसी रचनाएं कीं। उन्होंने 'शिशुहत्या विरोधी गृह' स्थापित किया, जहां विधवाएं अपने बच्चों को जन्म दे सकती थीं और उन्हें छोड़ सकती थीं। सावित्रीबाई फुले का निधन 10 मार्च, 1897 को प्लेग के दौरान मरीजों की सेवा करते हुए हुआ, जब उन्होंने एक संक्रमित बच्चे को अपनी पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुँचाया था।

समारोह के अंतर्गत कई शैक्षिक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में शाम्भवी, शिवांश, विभू, शिविका, श्रुति और रुद्रवीर ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में शिविका, शाम्भवी, शिवांश मिश्रा, श्रुति, आदित्य, कार्तिक, हिमानी मौर्य, अलंकरिता मिश्रा, विभू शुक्ला, शिवांश मौर्य, अंशिका सिंह और उमेमा नियास ने भाग लिया। निबंध प्रतियोगिता में मानसी, आरुष, संध्या, प्रतिज्ञा, अलका, अलीजा, अदीबा और शिवा सहित अन्य विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को आत्मसात किया। उन्होंने समाज में शिक्षा के प्रसार के महत्व को समझा। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

प्रमुख वक्ताओं में रेनू श्रीवास्तव, डॉ. अंगद सिंह, अतुल पाठक (पूर्व संचालन प्रबंधक, संजय गांधी अस्पताल अमेठी), कॉलेज प्रबंधक संजय त्रिपाठी, प्रधानाचार्य अभिषेक शर्मा, पूर्व प्रधान रीता श्रीवास्तव, बिंदेश्वरी दुबे, राकेश विश्वकर्मा और विनोद पांडेय आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहे छात्र-छात्राओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के विद्यालयों के साथ-साथ बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों और महिलाओं ने भी भाग लिया। राधा फाउंडेशन के अध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव ने बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, विद्यालय प्रबंधन और क्षेत्रवासियों के प्रति भी कृतज्ञता ज्ञापित की। कार्यक्रम का संचालन अनुश्री श्रीवास्तव और अक्षिता श्रीवास्तव ने कुशलतापूर्वक किया। विद्यालय की शिक्षिका आंचल का इस आयोजन में विशेष योगदान रहा।

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