तेहरान (आरएनआई)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। तेल और ऊर्जा ठिकानों के बाद अब शैक्षणिक संस्थान भी इस टकराव की चपेट में आते नजर आ रहे हैं। तेहरान स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर कथित हमले के बाद ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच तनाव और अधिक गहरा गया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने इस घटना के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी और इस्राइली विश्वविद्यालयों को संभावित निशाना घोषित कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से जारी बयान में आईआरजीसी ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में ईरान के शैक्षणिक और सांस्कृतिक ढांचे पर सुनियोजित तरीके से हमले किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य देश की वैज्ञानिक क्षमता को कमजोर करना है।
आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि यदि ये हमले नहीं रुके, तो जवाबी कार्रवाई के तहत क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इस्राइली विश्वविद्यालयों को निशाना बनाया जा सकता है। संगठन ने इन संस्थानों से जुड़े छात्रों, शिक्षकों और आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और परिसरों से दूरी बनाए रखने की सलाह भी दी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी अमेरिका और इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों देश जानबूझकर ईरान के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और तेहरान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी का उदाहरण देते हुए दावा किया कि पिछले एक महीने में कई शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाया गया है।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियानों के पीछे असली मकसद उसके वैज्ञानिक और बौद्धिक ढांचे को कमजोर करना है, जबकि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दिए जा रहे तर्क केवल बहाना हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति इसी तरह बिगड़ती रही, तो इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक राजनीति पर भी गहरा पड़ सकता है।
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