मुनिश्री से कथित अभद्रता पर जैन समाज में आक्रोश, थाने का घेराव; दो महिलाओं पर मामला दर्ज

Friday, July 31, 2026 - 18:41
Updated: 2 days ago
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मुनिश्री से कथित अभद्रता पर जैन समाज में आक्रोश, थाने का घेराव; दो महिलाओं पर मामला दर्ज

जिले के आरोन कस्बे में चातुर्मास कर रहे जैनाचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री निर्मोह सागरजी महाराज के साथ कथित अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की घटना से जैन समाज में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। गुरुवार को बड़ी संख्या में समाज के लोग थाने पहुंच गए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया। घटना को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए समाज ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

आरोन नगर में इन दिनों मुनिश्री निरोग सागरजी महाराज का चार मुनियों के संघ के साथ चातुर्मास चल रहा है। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार सुबह लगभग 11:21 बजे मुनिश्री निर्मोह सागरजी आहारचर्या के बाद मंदिर लौट रहे थे। इसी दौरान प्रताप जैन के घर के सामने कथित रूप से कीर्ति सोलंकी और पूजा सोलंकी ने मुनिश्री के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा जैन समाज के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों महिलाओं ने यह तक कह दिया कि यदि भविष्य में जैन समाज का कोई साधु-महात्मा इस रास्ते से निकला तो उसे जान से खत्म कर देंगे। इस घटना से मौके पर मौजूद समाजजन स्तब्ध रह गए और देखते ही देखते पूरे नगर में इसकी जानकारी फैल गई। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस एक महिला को गिरफ्तार कर थाने ले गई।

घटना के विरोध में सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष विजय कुमार जैन के नेतृत्व में संजय जैन, संतोष जैन, संजीव जैन, मिन्टूलाल जैन, अमन जैन, जैकी जैन, राजीव जैन, मुनेश जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग आरोन थाने पहुंचे। समाज ने लिखित आवेदन देकर कहा कि मुनिश्री के साथ किया गया दुर्व्यवहार केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे जैन धर्म का अपमान है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर कीर्ति सोलंकी और पूजा सोलंकी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296(बी), 351(3) तथा 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जैन समाज का कहना है कि साधु-संतों का सम्मान भारतीय संस्कृति की पहचान है और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। समाज ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ शीघ्र और कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को कानून के अनुसार सख्त सजा मिलनी चाहिए।

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