महिला आरक्षण पर सरकार का फॉर्मूला तय: 2029 से लागू होगा कानून, लोकसभा सीटें 50% बढ़ेंगी; OBC कोटा शामिल नहीं
नई दिल्ली (आरएनआई)। महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इसका रोडमैप लगभग तय कर लिया है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण 2029 Indian general election से लागू किया जाएगा। हालांकि, इस आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से कोटा शामिल नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का भी फॉर्मूला तैयार किया गया है।
सरकार इस बहुप्रतीक्षित कानून, Nari Shakti Vandan Adhiniyam, को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इस मुद्दे पर न केवल विपक्षी दलों से बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी विस्तृत चर्चा की जा रही है। हाल ही में हुई एक अहम बैठक में संविधान संशोधन विधेयक पर सहमति बन गई, हालांकि OBC आरक्षण जैसे मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।
बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने सहयोगी दलों को विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि जनगणना और परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया 2029 तक ही पूरी हो पाएगी। ऐसे में सरकार आगामी आम चुनाव से ही महिला आरक्षण लागू कर अपने वादे को पूरा करना चाहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में सीटों की संख्या को आनुपातिक आधार पर बढ़ाया जाएगा।
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, 2023 में पारित कानून को 2029 से प्रभावी करने का ही मूल संकल्प था। विपक्षी दलों का भी मानना है कि सरकार ने निकट भविष्य के विधानसभा चुनावों में इसे लागू करने के संकेत नहीं दिए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण सीधे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जाएगा।
OBC कोटे के सवाल पर Amit Shah ने कहा कि संवैधानिक रूप से महिला आरक्षण के भीतर अलग से पिछड़ा वर्ग कोटा देना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण लागू होने के बाद राजनीतिक दल टिकट वितरण में सामाजिक संतुलन बनाएंगे, जिससे पिछड़े वर्ग की महिलाओं की भागीदारी स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी।
बैठक में जातिगत जनगणना को लेकर भी चर्चा हुई। एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि पिछली बार जातियों और उपजातियों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण आंकड़ों का उपयोग करना कठिन हो गया था। चूंकि जाति की पहचान व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है, इसलिए आगामी गणना में भी यही चुनौती सामने आ सकती है।
विधेयक को पेश करने की रणनीति पर सरकार दो विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला, मौजूदा सत्र के बाद विशेष रूप से दो दिन की बैठक बुलाना और दूसरा, पांच राज्यों के चुनाव के बाद मई में विशेष सत्र आयोजित करना। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रमुख विपक्षी दल इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति जता चुके हैं, जबकि अन्य दलों से बातचीत जारी है।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट हो चुका है और अब अंतिम राजनीतिक सहमति के बाद इसे लागू करने की दिशा में औपचारिक कदम उठाए जाने की तैयारी है।
Follow RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6X
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)