पेपर लीक से फिर घिरी एनटीए, नीट विवाद ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में है। नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और कई सवाल पहले से सार्वजनिक होने के आरोपों के बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने 2015 के चर्चित एआईपीएमटी पेपर लीक मामले की यादें भी ताजा कर दी हैं।
देशभर में नीट, जेईई, सीयूईटी और यूजीसी-नेट जैसी प्रमुख परीक्षाएं आयोजित करने वाली एनटीए पिछले कुछ वर्षों से लगातार आलोचनाओं का सामना कर रही है। 2024 में भी परीक्षा प्रबंधन को लेकर विवाद सामने आए थे, जिसके बाद सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी। विशेषज्ञों ने डिजिटल सुरक्षा, परीक्षा केंद्र प्रबंधन और तकनीकी ढांचे में बदलाव की सिफारिशें दी थीं, लेकिन हालिया घटनाओं ने संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं हो सके।
इस वर्ष नीट-यूजी परीक्षा के बाद सबसे पहले भौतिकी के कुछ न्यूमेरिकल प्रश्नों को लेकर विवाद शुरू हुआ। बाद में कथित पेपर लीक और 120 प्रश्न पहले से वायरल होने के दावों ने मामला और गंभीर बना दिया। इससे पहले जेईई मेन की आंसर-की में भी कई त्रुटियां सामने आई थीं, जिन्हें छात्रों की शिकायतों के बाद सुधारना पड़ा था। वहीं सीयूईटी परीक्षा में दूरदराज शहरों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने पर भी छात्रों ने नाराजगी जताई थी।
लगातार सामने आ रही इन गड़बड़ियों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। लाखों उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ी इन परीक्षाओं में छोटी चूक भी मानसिक दबाव और शैक्षणिक नुकसान का कारण बनती है। आलोचकों का कहना है कि बार-बार होने वाली तकनीकी और प्रशासनिक विफलताएं एजेंसी की तैयारी और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े करती हैं।
पिछले दो वर्षों में एजेंसी में नेतृत्व स्तर पर भी लगातार बदलाव हुए हैं। तीन महानिदेशकों के बदलने से संस्थागत स्थिरता प्रभावित हुई है, जिसका असर परीक्षा प्रबंधन पर भी देखने को मिल रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और संबंधित एजेंसियां परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं।
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