छात्र आंदोलनों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: नाबालिगों और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वालों की रिहाई के आदेश, सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश
नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही पात्र छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि छात्रों पर पुलिस की कथित ज्यादती के आरोप प्रथम दृष्टया स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। अदालत ने कहा कि मामले की पारदर्शी जांच के लिए आगे चलकर स्वतंत्र समिति या विशेष जांच दल (SIT) के गठन पर भी विचार किया जा सकता है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उन सभी राज्यों को निर्देश दिया, जहां प्रदर्शन हुए थे, कि सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, पीसीआर लॉग तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ा डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक न किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जबरन कार्रवाई से राहत केवल उन छात्र प्रदर्शनकारियों को मिलेगी, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत ने कहा कि यह अंतरिम सुरक्षा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर लागू नहीं होगी। पीठ ने दिल्ली सरकार को दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन सुनवाई पूरी होने तक पात्र छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों से याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान घायल हुए 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि जिसने भी कानून अपने हाथ में लिया है या अपनी सीमा से बाहर जाकर कार्रवाई की है, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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