गुनिया नदी पर सियासत और सवाल: बैठक में नगरपालिका की गैरहाजिरी पर उठे मुद्दे, जिम्मेदारी तय करने की मांग
गुनिया नदी की सफाई और संरक्षण को लेकर आयोजित अहम बैठक में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए। गुरुवार 30 अप्रैल 2026 को गुना कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर की अध्यक्षता में गुनिया नदी और भुजरिया तालाब के संरक्षण को लेकर बैठक बुलाई गई थी, जिसमें विभिन्न विभागों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को आमंत्रित किया गया था।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक में नगरपालिका परिषद गुना की अनुपस्थिति ने विवाद खड़ा कर दिया। आरोप है कि न तो प्रभारी सीएमओ उपस्थित रहीं और न ही तकनीकी या स्वास्थ्य शाखा का कोई प्रतिनिधि बैठक में पहुंचा। इस पर बैठक के दौरान कलेक्टर डीएम कन्याल ने भी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाए।
बताया जा रहा है कि इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए भोपाल स्तर से नोटिस भी जारी किया गया है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि गुनिया नदी की सफाई और रखरखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी नगरपालिका की ही है, ऐसे में उसकी गैरहाजिरी को जिम्मेदारी से बचने के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं, जल संसाधन विभाग गुना के अधीन मकरावदा डेम से जुड़े फीडिंग नाले/नदी की स्थिति पर भी चर्चा हुई, जिसे गंदगी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इस पूरे मुद्दे पर वरिष्ठ भाजपा नेता और ‘गुनिया बचाओ अभियान’ के प्रणेता राहुल जैन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गुनिया नदी की बदहाल स्थिति के लिए दो प्रमुख संस्थाएं—नगरपालिका परिषद और जल संसाधन विभाग—जवाबदेह हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी न तो संसाधन देने में रुचि दिखा रहे हैं और न ही जनहित के मुद्दों पर गंभीर हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस लापरवाही पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई करेगा या मामला सिर्फ बैठकों और नोटिस तक ही सीमित रह जाएगा। गुनिया नदी को बचाने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही तय होना अब बेहद जरूरी माना जा रहा है।
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